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    टम्बलर और सिपर का बढ़ता ट्रेंड, क्या यह वास्तव में स्वास्थ्य के लिए बेहतर है?

    आजकल युवाओं, फिटनेस प्रेमियों और वर्किंग प्रोफेशनल्स के बीच स्टाइलिश सिपर बोतल, टम्बलर और स्ट्रॉ (पाइप) के जरिए पानी या जूस पीने का चलन बेहद तेजी से बढ़ा है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की रील्स से लेकर जिम और कॉर्पोरेट दफ्तरों तक, हर जगह ये फैंसी टम्बलर नजर आ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि स्ट्रॉ की मदद से वे ज्यादा पानी पी पाते हैं और खुद को आसानी से हाइड्रेटेड रख पाते हैं। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुविधा देने वाले इन सिपर और स्ट्रॉ का लगातार इस्तेमाल सेहत पर कुछ विपरीत असर भी डाल सकता है।

    आइए गहराई से समझते हैं कि हर वक्त स्ट्रॉ या सिपर से पानी पीने के क्या फायदे और नुकसान हैं:

    स्ट्रॉ या सिपर के इस्तेमाल से होने वाले फायदे

    • ज्यादा पानी पीने में मददगार: सिपर सामने रखे होने और स्ट्रॉ से पीना आसान होने के कारण लोग काम के बीच-बीच में बार-बार पानी पीते रहते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) नहीं होती।

    • काम और ड्राइविंग के दौरान सहूलियत: जिम में वर्कआउट करते समय, ऑफिस में मल्टीटास्किंग के दौरान या गाड़ी चलाते वक्त सिपर से पानी पीना सुरक्षित और आसान होता है, क्योंकि इसमें पानी छलकने का डर नहीं रहता।

    • दांतों के इनेमल का बचाव: जब आप कोई खट्टा जूस, कोल्ड ड्रिंक या एसिडिक ड्रिंक स्ट्रॉ से पीते हैं, तो वह सीधा गले में जाता है और दांतों को नहीं छूता। इससे दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) एसिड के बुरे असर से बच जाती है।

    • मरीजों और बच्चों के लिए आसान: बिस्तर पर लेटे हुए मरीजों या छोटे बच्चों के लिए, जिन्हें गिलास पकड़कर पानी पीने में दिक्कत होती है, सिपर एक बेहतरीन और सुरक्षित माध्यम है।

    लगातार स्ट्रॉ इस्तेमाल करने के छिपे हुए नुकसान

    • पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या: जब हम स्ट्रॉ से पानी खींचते हैं, तो पानी के साथ-साथ मुंह में मौजूद अतिरिक्त हवा भी हमारे पेट के अंदर चली जाती है। इसकी वजह से पेट फूलना (ब्लोटिंग), गैस और डाइजेशन में असहजता की शिकायत हो सकती है।

    • बैक्टीरिया और फंगस का घर: सिपर की बोतल, उसके ढक्कन और खास तौर पर पतली स्ट्रॉ के अंदरूनी हिस्से को रोज अंदर तक साफ करना काफी मुश्किल होता है। अगर इसकी नियमित और डीप क्लीनिंग न की जाए, तो इसमें हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस पनप जाते हैं, जो पानी के जरिए पेट में जाकर इन्फेक्शन फैला सकते हैं।

    • चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां (फाइन लाइन्स): लगातार सालों तक स्ट्रॉ से पानी पीने के लिए होंठों को सिकोड़ना पड़ता है। बार-बार चेहरे की मांसपेशियों पर पड़ने वाले इस दबाव के कारण होंठों के आसपास समय से पहले महीन रेखाएं और झुर्रियां उभर सकती हैं।

    • पर्यावरण को भारी नुकसान: टम्बलर के साथ आने वाली सिंगल-यूज प्लास्टिक स्ट्रॉ पर्यावरण की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। ये कभी नष्ट नहीं होतीं और प्लास्टिक प्रदूषण को कचरे के ढेर में तब्दील कर देती हैं।

    हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह

    "रोजमर्रा में सामान्य पानी पीने के लिए पारंपरिक रूप से गिलास या सीधे बोतल से पानी पीना ही सबसे बेस्ट और सुरक्षित तरीका है। अगर आप सुविधा के लिए सिपर या स्ट्रॉ का उपयोग करते भी हैं, तो प्लास्टिक के बजाय स्टील, कांच या बांस (बैम्बू) की स्ट्रॉ चुनें और उसकी रोजाना पतले ब्रश से अच्छी तरह सफाई जरूर करें।"

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