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    बर्थडे केक के साथ 2 मेटल पिन निगल गया बच्चा, 48 घंटे की चिंता ने परिवार को झकझोरा

    ठाणे। नन्हे रेयांश के तीसरे जन्मदिन का उत्सव जहां परिवार के लिए बेहद खुशी का मौका होना था, वहीं यह अचानक 48 घंटों के अत्यंत तनाव और गहरे सदमे में तब्दील हो गया। यह दर्दनाक स्थिति तब उत्पन्न हुई जब मासूम ने खेल-खेल में अपने बर्थडे केक के ऊपर सजावट के लिए रखी चॉकलेट बॉलिंग पिन के भीतर छिपी दो लोहे की नुकीली पिनों को अनजाने में निगल लिया। ठाणे के हीरानंदानी एस्टेट की निवासी और पेशे से जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की शिक्षिका स्नेहा शेलार के लिए यह घटना किसी भयावह दुःस्वप्न जैसी साबित हुई। हालांकि, चिकित्सा निगरानी के बाद रेयांश के शरीर से वे धात्विक टुकड़े सुरक्षित रूप से बाहर आ गए हैं, परंतु इस हादसे का गहरा मानसिक आघात पीड़ित मां के मन पर अब भी अंकित है।

    साज-सज्जा के सामान में छिपे मिले लोहे के तार, बेकरी पर लापरवाही का आरोप

    पीड़ित बच्चे की मां स्नेहा के अनुसार, उन्होंने 31 मई को रेयांश के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर उसकी पसंद के अनुरूप 'स्पाइडरमैन-थीम' और कस्टमाइज़्ड बॉलिंग एली केक के साथ एक शानदार पार्टी का आयोजन किया था। सब कुछ उनकी योजना के अनुसार बेहद सुखद चल रहा था, परंतु अगले ही दिन बच्चे के वास्तविक जन्मदिन पर पूरा परिवार जश्न मनाने के स्थान पर अस्पताल के चक्कर काट रहा था। मां ने स्थानीय बेकरी संचालक पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि यह केक छोटे बच्चों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके बावजूद बेकरी ने बिना कोई पूर्व सूचना या चेतावनी दिए, चॉकलेट से बनी बॉलिंग पिन को ढांचागत सहारा देने के लिए उसके भीतर लोहे की नुकीली पिनें डाल दी थीं, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती थीं।

    एक्स-रे स्कैन में आंतों के भीतर फंसी दिखीं दो धात्विक पिनें

    इस गंभीर खतरे की भनक परिवार को तब लगी जब घर के बड़े बच्चों को केक की सजावटी सामग्री के भीतर लोहे की छड़ें दिखाई दीं और उन्होंने तुरंत अपने माता-पिता को इस बात की जानकारी दी। छोटा रेयांश भी वहीं मौजूद था, जिससे परिजनों को आशंका हुई कि कहीं उसने भी इसे मुंह में न डाल लिया हो। इसी डर के चलते अगली सुबह मासूम को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका डिजिटल एक्स-रे किया। स्कैन की रिपोर्ट देखते ही माता-पिता के होश उड़ गए, क्योंकि रेयांश की छोटी आंत के भीतर लोहे की दो पिनें साफ तौर पर फंसी हुई नजर आ रही थीं।

    ऑपरेशन न करने की मिली सलाह और उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मुआवजे का प्रावधान

    जुपिटर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञों ने मामले का गहन परीक्षण करने के बाद तुरंत सर्जरी न करने का फैसला लिया, क्योंकि पिनें पहले ही आंत के काफी अंदर तक का सफर तय कर चुकी थीं। डॉक्टरों ने परिवार को धैर्य रखने और मलोत्सर्ग के जरिए उनके प्राकृतिक रूप से बाहर आने का इंतजार करने की चिकित्सकीय सलाह दी। पूरे 48 घंटों तक खौफ के साए में रहने के बाद आखिरकार वे दोनों नुकीले तार प्राकृतिक रूप से बच्चे के शरीर से बाहर निकल आए और वह पूरी तरह खतरे से मुक्त हो गया। इस संवेदनशील घटना को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पीड़ित मां ने सभी अभिभावकों को सचेत किया है कि वे बच्चों के लिए केक आर्डर करते समय बेकर से छिपे हुए सपोर्ट और सजावटी चीजों के खाने योग्य होने की प्रामाणिक जानकारी अवश्य लें। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की गंभीर लापरवाही के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत शारीरिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए बेकरी निर्माता और विक्रेता के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में सीधे मुआवजे का दावा पेश किया जा सकता है।

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