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    अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर विवाद, पूर्व पार्षद के मकान को लेकर उठा सवाल

    अतिक्रमण अभियान के दौरान पक्षपात के आरोपों से माहौल गरमाया

    अलवर। शहर में नगर निगम और यूआईटी की संयुक्त अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी रही। नयाबास सर्किल से लेकर ज्योतिबा फुले पुलिस सर्किल तक बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई।

    इस दौरान नालों और सार्वजनिक भूमि पर बने अतिक्रमणों को जेसीबी की मदद से ध्वस्त किया गया। लेकिन कार्रवाई के बीच एक स्थान पर विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

    अतिक्रमण कार्रवाई में पूर्व पार्षद का मामला गरमाया

    कार्रवाई के दौरान पूर्व भाजपा पार्षद सीताराम के मकान पर भी कार्रवाई पहुंची, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने पक्षपात के आरोप लगाए।

    लोगों का कहना था कि अन्य स्थानों पर पूरी तरह सख्ती दिखाई गई, जबकि पूर्व पार्षद के मकान पर केवल आंशिक कार्रवाई की गई।

    इसको लेकर मौके पर कुछ देर तक बहस और विरोध का माहौल बना रहा।

    अतिक्रमण कार्रवाई पर पूर्व पार्षद का पक्ष

    पूर्व पार्षद सीताराम ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यदि पूरा निर्माण तोड़ दिया जाता तो उनके घर में आने-जाने का रास्ता बंद हो जाता।

    उन्होंने कहा कि प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई की है और कोई गलत मंशा नहीं है।

    अतिक्रमण कार्रवाई पर प्रशासन का जवाब

    इस मामले पर अतिक्रमण अधिकारी निशा लेखनी और यूआईटी तहसीलदार मानवेंद्र सिंह ने पक्षपात के आरोपों को खारिज कर दिया।

    अधिकारियों ने कहा कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और निष्पक्ष रूप से की जा रही है।

    अतिक्रमण अभियान आगे भी जारी रहेगा

    अधिकारियों ने बताया कि नालों के बहाव में बाधा बनने वाले निर्माणों को प्राथमिकता से हटाया जा रहा है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा और जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां कार्रवाई जारी रहेगी।

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