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    Pranit More पर कानूनी शिकंजा, आपत्तिजनक कंटेंट प्रमोट करने के आरोप में FIR दर्ज

    मुंबई। महाराष्ट्र साइबर सेल ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कथित रूप से अश्लील और अमर्यादित कंटेंट परोसने के आरोप में स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे सहित कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। राज्य में इंटरनेट से जुड़े अपराधों की जांच करने वाली इस नोडल एजेंसी ने अपने विशेष पुलिस थाने में यह प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया की नियमित मॉनिटरिंग के दौरान कुछ ऐसे वीडियो और क्लिप्स सामने आए, जिनमें महिलाओं की गरिमा, आपसी सहमति (कंसेंट) और मृत व्यक्तियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक व सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ टिप्पणियां की गई थीं। यह पूरा विवाद स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे के एक शो से जुड़े वीडियो क्लिप्स के यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने के बाद शुरू हुआ।

    इस मामले में केंद्रीय कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) 2000 की धारा 67 के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है। दर्ज की गई एफआईआर में मुख्य रूप से शो के संचालक प्रणित मोरे, हिमांशु जांगरा और डॉ. सेजल पवार को नामजद आरोपी बनाया गया है।

    अमर्यादित टिप्पणियों और बयानों पर कानूनी शिकंजा

    साइबर पुलिस को तफ्तीश के दौरान जो वीडियो साक्ष्य मिले हैं, उनमें से एक क्लिप में हिमांशु जांगरा द्वारा कथित तौर पर यह दलील दी जा रही थी कि डेटिंग के दौरान पैसे खर्च करने के बाद पुरुष को महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने का अधिकार मिल जाता है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस तरह की बातें महिलाओं को एक वस्तु के रूप में पेश करती हैं और स्त्री गरिमा व आपसी सहमति जैसे गंभीर विषयों का मजाक उड़ाती हैं। इसके अलावा, एक अन्य वीडियो में डॉ. सेजल पवार नामक महिला आरोपी द्वारा चिकित्सा शिक्षा (मेडिकल स्टडीज) के लिए इस्तेमाल होने वाले शवों और मृत पुरुषों के शरीरों पर बेहद अश्लील व भद्दी टिप्पणियां करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने इसे मृत इंसानों के सम्मान के खिलाफ और सार्वजनिक शालीनता के पैमानों का घोर उल्लंघन माना है।

    आर्थिक मुनाफे के लिए अश्लीलता परोसने का आरोप

    जांच टीम का सीधा आरोप है कि इस प्रकार के आपत्तिजनक कंटेंट को प्रणित मोरे के कार्यक्रम के दौरान जानबूझकर रिकॉर्ड किया गया और बाद में इसे अलग-अलग डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित किया गया। ऐसा करने के पीछे का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर ज्यादा से ज्यादा व्यूअरशिप हासिल करना, फॉलोअर्स बढ़ाना और ऑनलाइन मोनेटाइजेशन के जरिए मोटा आर्थिक लाभ कमाना था। मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए महाराष्ट्र साइबर ने तीनों मुख्य आरोपियों को आधिकारिक समन जारी कर पूछताछ के लिए हाजिर होने और अपने बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों की पहचान के लिए जांच अभी जारी है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग को लेकर पुलिस की अपील

    इस बड़ी कार्रवाई के बीच साइबर सेल ने इंटरनेट जगत से जुड़े कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और आम यूजर्स के लिए एक जरूरी एडवायजरी जारी की है। प्रशासन ने अपील की है कि डिजिटल स्पेस में किसी भी सामग्री को तैयार या साझा करते समय देश के कानूनों और सामाजिक जिम्मेदारियों का पूरा ध्यान रखा जाए। इसके साथ ही आम नागरिकों को सचेत किया गया है कि वे इस तरह के किसी भी विवादित, अश्लील या आपत्तिजनक वीडियो को आगे फॉरवर्ड, लाइक या शेयर न करें, क्योंकि ऐसा करना भी कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसा करने वालों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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