More
    Homeराज्यपंजाबमीनाक्षी के नाम पर ढाई करोड़ का लोन लेने का आरोप, पति...

    मीनाक्षी के नाम पर ढाई करोड़ का लोन लेने का आरोप, पति के खिलाफ मामला दर्ज

    जालंधर। पंजाब के जालंधर शहर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां नेशनल आई केयर अस्पताल के संचालक डॉक्टर परिवार की बहू डॉ. मीनाक्षी सूद ने रहस्यमयी परिस्थितियों में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने मृतका के पति डॉ. पीयूष सूद के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से ही आरोपी डॉक्टर अपने क्लीनिक और आवास से फरार बताया जा रहा है, जिसकी धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। मृतका के पिता प्रमोद कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर थाना डिवीजन नंबर-6 की पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की है। डॉ. मीनाक्षी सूद खुद कपूरथला के एक सरकारी अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रही थीं।

    करोड़ों के कर्ज का वित्तीय जाल

    मृतका के मायके वालों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि डॉ. पीयूष सूद ने अपनी पत्नी मीनाक्षी की जानकारी और अनुमति के बिना धोखे से उनके नाम पर लगभग ढाई करोड़ रुपये का भारी-भरकम बैंक लोन ले रखा था। जब डॉ. मीनाक्षी को अचानक इस बात की भनक लगी कि उनके नाम पर इतना बड़ा वित्तीय दायित्व थोप दिया गया है, तो वह गहरे मानसिक तनाव में आ गईं। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष अपनी महंगी गाड़ियों और व्यक्तिगत शौक के लिए जो भी कर्ज लेता था, उसकी मासिक किस्तें (EMI) डॉ. मीनाक्षी को अपनी सरकारी नौकरी की तनख्वाह से जबरन चुकानी पड़ती थीं।

    पारिवारिक कलह और विवाहेतर संबंध

    परिजनों द्वारा दर्ज कराए गए बयानों के मुताबिक, डॉ. पीयूष का उनके ही अस्पताल में काम करने वाली एक महिला स्टाफ के साथ कथित तौर पर प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर घरेलू झगड़े होते थे। बात इस हद तक बिगड़ चुकी थी कि साल 2025 में पीयूष ने कथित तौर पर मीनाक्षी का गला दबाकर उन्हें जान से मारने का प्रयास भी किया था। इन तमाम विवादों के कारण जुलाई 2025 से ही दोनों पूरी तरह से अलग रह रहे थे और डॉ. मीनाक्षी कानूनी रूप से तलाक लेने का मन बना चुकी थीं, लेकिन इसी बीच करोड़ों के लोन की बात सामने आने पर वह पूरी तरह टूट गईं।

    पुलिसिया दबिश और कानूनी तफ्तीश तेज

    स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही आरोपी डॉक्टर भूमिगत हो गया है। पुलिस की विशेष टीमें उसके संभावित ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों पर लगातार दबिश दे रही हैं। प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के विवरण और पूर्व में हुए पारिवारिक विवादों से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच शुरू कर दी है। वर्ष 2018 में परिणय सूत्र में बंधे इस जोड़े की कोई संतान नहीं थी। मृतका के माता-पिता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच की जाए और उनकी बेटी को इस आत्मघाती कदम के लिए मजबूर करने वाले दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here