कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी भीषण अंदरूनी कलह के बीच नया मोड़ आ गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने एक बहुत बड़ा दावा करते हुए कहा है कि पार्टी के 64 असंतुष्ट विधायक इस समय उनके पाले में खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन सभी बागी विधायकों के नामों की सूची विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को लिखित रूप में सौंप दी गई है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को संख्या बल को लेकर कोई भी संदेह हो, तो वे सदन में 'फ्लोर टेस्ट' (बहुमत परीक्षण) करवा सकते हैं, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। नवनिर्वाचित विधायकों देबांग्शु पांडा और स्वाति खंडाकर के आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने यह बातें कहीं। उन्होंने उदाहरण दिया कि जिस तरह दिल्ली में बागी सांसदों के गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को अपनी सूची दी थी, ठीक उसी तर्ज पर बंगाल में भी असंतुष्ट विधायकों ने अपनी एकजुटता की सूची विधानसभा अध्यक्ष को सौंपकर पृथक पहचान की मांग की है।
फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित करने का खुला चैलेंज
विपक्षी नेता ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनके खेमे में शामिल विधायकों की संख्या 64 तक पहुंच चुकी है और सदन के पटल पर शक्ति परीक्षण होने की स्थिति में वे आसानी से अपना पूर्ण बहुमत साबित कर देंगे। 'न्यू तृणमूल' गुट के अगुआ बनकर उभरे ऋतब्रत बनर्जी ने संकेत दिया कि आगामी सोमवार या मंगलवार तक उनके इस धड़े की वास्तविक सांगठनिक ताकत और राजनैतिक भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। हालांकि, इस दौरान उन्होंने किसी भी व्यक्तिगत नेता के नाम पर सीधी टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया। कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम को लेकर चल रहे कयासों और राजनीतिक अटकलों पर भी उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी और कोई जवाब नहीं दिया।
शपथ ग्रहण में उपस्थिति को बताया केवल नैतिक दायित्व
स्वाति खंडाकर के शपथ ग्रहण समारोह में अपनी मौजूदगी को लेकर ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि होने के नाते इस कार्यक्रम में शिरकत करना उनकी केवल एक नैतिक जिम्मेदारी थी। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि उनकी इस उपस्थिति का कोई दूसरा राजनीतिक अर्थ या नया समीकरण न निकाला जाए। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा पिछले दिनों दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जो बातें उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर उठाई हैं, वास्तव में वही मुद्दे और शिकायतें असंतुष्ट खेमा पिछले लंबे समय से सामूहिक रूप से नेतृत्व के सामने रखता आ रहा है।
सांसदों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर सवाल
तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान सांगठनिक ढांचे पर तीखा प्रहार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कई गंभीर आरोप भी मढ़े। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र पूरी तरह समाप्त हो चुका है और सांसदों को अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों से जुड़ी जनता की बुनियादी समस्याओं एवं स्थानीय मुद्दों पर संसद अथवा अन्य मंचों पर स्वतंत्र रूप से आवाज उठाने की पर्याप्त आजादी नहीं दी जाती थी। इसी तानाशाही और घुटन भरे माहौल के कारण आज पार्टी के भीतर असंतोष का यह बड़ा विस्फोट हुआ है, जिसके चलते अधिकांश विधायक और सांसद अब वैकल्पिक मार्ग चुनने के लिए विवश हो गए हैं।


