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    चंदे की रकम पर डाका: राम मंदिर में मार्च 2025 से हो रहा था गबन

    अयोध्या: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चंदे की राशि में हेरफेर और गबन का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, पैसों की चोरी का यह खेल पिछले सवा साल से बहुत ही चालाकी से चल रहा था। इसकी शुरुआत 25 मार्च 2025 को हुई थी, जिसके बाद से आरोपी कर्मचारी हर रोज चंदे की गिनती के समय नियमित रूप से रकम पार कर रहे थे। जब मामले का शक हुआ, तो गुप्त रूप से निगरानी बढ़ाई गई और तब जाकर इस पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने आखिरी के कुछ महीनों में सबसे बड़ी रकम पर हाथ साफ किया था।

    सुरक्षा और बड़ी लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

    हैरानी की बात यह है कि पूरा राम मंदिर परिसर हर समय सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में रहता है। चंदे की रकम की गिनती जैसा सबसे महत्वपूर्ण काम केवल इन पांच कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया था। यह बात गले नहीं उतरती कि जहां रोजाना लाखों-करोड़ों रुपयों की गिनती होती हो, वहां सिर्फ यही पांच लोग मौजूद हों। गिनती के समय वहां कई बड़े पदाधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहते थे। ऐसे में उनकी मौजूदगी और सख्त पहरे के बीच इतनी बड़ी रकम चोरी हो जाना और किसी को कानों-कान खबर न होना, व्यवस्था पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। आशंका जताई जा रही है कि इस साजिश में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिसके चलते पकड़े गए संदिग्धों के करीबी लोग भी अब जांच के दायरे में आ गए हैं।

    एफआईआर दर्ज न होने और ट्रस्ट की चुप्पी से गहराया संशय

    चंदे की चोरी की बात साफ होने और पैसे बरामद होने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है, जो अपने आप में एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से अब तक पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की गई। हालांकि ट्रस्ट अपने स्तर पर जांच कर सकता है, लेकिन किसी संदिग्ध को पकड़ना, उससे पूछताछ करना और उसके घर से चोरी के पैसे बरामद करना पुलिस और कानूनी एजेंसियों का काम है, न कि ट्रस्ट का। इस मामले में ट्रस्ट की चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा कर रही है कि कहीं किसी बड़े रसूखदार नाम को बचाने के लिए तो मामला दबाने की कोशिश नहीं हो रही है। साथ ही, समय रहते जांच एसआईटी को न सौंपने से यह डर भी है कि आरोपियों को सबूत मिटाने का पूरा मौका मिल गया।

    निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बनाई दूरी

    इस पूरे दानपात्र विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। जब एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने उनसे इस महाघोटाले को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने यह कहते हुए इस पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया कि उनका काम केवल मंदिर के निर्माण कार्य को देखना है, और कुछ नहीं। उनके इस बयान के बाद भी मंदिर परिसर में बैठकों का दौर जारी रहा, जिसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य मुख्य पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच ट्रस्ट और पुलिस अपने-अपने स्तर पर सुलझाने में जुटी हुई है।

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