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    उद्धव ठाकरे की इमरजेंसी मीटिंग में नहीं पहुंचे 5 सांसद, बढ़ीं बगावत की अटकलें

    मुंबई। महाराष्ट्र के राजनैतिक गलियारों में एक बार फिर भारी उथल-पुथल और जोड़-तोड़ की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी के भीतर बड़ी फूट की खबरों के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने मुंबई स्थित आवास 'मातोश्री' में पार्टी सांसदों की एक बेहद महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पार्टी के सभी 9 सांसदों को अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस बैठक से 5 सांसद नदारद रहे। सांसदों की इतनी बड़ी संख्या में अनुपस्थिति ने शिवसेना (यूबीटी) के भीतर एक बार फिर बगावत के सुरों और बड़े दलबदल की आशंकाओं को हवा दे दी है।

    वरिष्ठ नेताओं की सफाई और अनुपस्थिति के पीछे के निजी कारण

    बैठक में सांसदों की कम मौजूदगी पर मचे सियासी घमासान के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया है। पार्टी के दिग्गज नेता अरविंद सावंत ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि बैठक अचानक बुलाई गई थी और जो सांसद नहीं पहुंच पाए, वे गंभीर व्यक्तिगत कारणों से फंसे थे। उन्होंने बताया कि एक सांसद के बच्चे की तबीयत खराब होने के कारण वह अस्पताल में हैं, दूसरे सांसद की पत्नी अस्वस्थ हैं, जबकि एक अन्य सांसद के घर में बेटी की शादी की तैयारियां चल रही हैं। वहीं, बैठक में शारीरिक रूप से मौजूद रहे सांसद अनिल देसाई ने भी इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया के तहत हुई बैठक थी। उन्होंने दावा किया कि जो 5 सांसद मुंबई नहीं आ सके, वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअली इस बैठक से जुड़े थे और पार्टी के सभी 9 सांसद पूरी तरह से एकजुट हैं।

    बैठक में शामिल हुए चेहरे और संजय राउत की मौजूदगी

    तमाम अटकलों और सुरक्षात्मक बयानों के बीच उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई इस आपातकालीन बैठक में जमीनी तौर पर पार्टी के चार लोकसभा सांसद ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके। मातोश्री पहुंचने वाले इन नेताओं में मुख्य रूप से राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे, अनिल देसाई, संजय देशमुख और नागेश पाटिल अष्टेकर शामिल थे। इसके अलावा, शिवसेना यूबीटी के कद्दावर नेता और इकलौते राज्यसभा सांसद संजय राउत भी इस महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में विशेष रूप से मौजूद रहे, जहां उन्होंने आगामी राजनैतिक चुनौतियों और पार्टी को बिखरने से बचाने के उपायों पर नेतृत्व के साथ गहन विचार-विमर्श किया।

    एकनाथ शिंदे गुट से संपर्क की अटकलें और गहराता राजनैतिक संकट

    यह आपात बैठक ऐसे नाजुक समय पर आयोजित की गई है, जब राजनैतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि उद्धव ठाकरे के खेमे के कई सांसद इस समय मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सीधे संपर्क में हैं। राजनैतिक गलियारों में तैर रही खबरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से उद्धव गुट के 9 में से 7 सांसद एकनाथ शिंदे से गुपचुप मुलाकातें कर रहे हैं और जल्द ही पाला बदलकर शिंदे गुट (असली शिवसेना) में शामिल होने का बड़ा फैसला ले सकते हैं। यद्यपि उद्धव खेमा इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज और निराधार बता रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के मौजूदा राजनैतिक घटनाक्रम को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि यदि आगामी कुछ दिनों में स्थिति साफ नहीं हुई, तो राज्य की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

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