More
    Homeदुनियापूर्व ऑस्ट्रेलियाई PM की चेतावनी से भारत में हलचल, सप्लाई चेन पर...

    पूर्व ऑस्ट्रेलियाई PM की चेतावनी से भारत में हलचल, सप्लाई चेन पर असर की आशंका

    तेल अवीव/ सिडनी। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां अमेरिका और ईरान के मध्य अप्रत्याशित रूप से हुए एक समझौते ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। इस आपसी रजामंदी के बाद दोनों मुल्कों के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध थमने और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य का व्यापारिक मार्ग पुनः बहाल होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया की स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से एक युगांतरकारी कदम करार दिया है, मगर दूसरी तरफ वैश्विक रक्षा और सामरिक मामलों के जानकार इस डील की प्रासंगिकता पर गंभीर संशय जता रहे हैं।

    स्थायी शांति के बजाय चुनावी लाभ के लिए महज एक अल्पकालिक युद्धविराम

    यरुशलम सेंटर फॉर सिक्योरिटी एंड फॉरेन अफेयर्स (JCFA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सागिव स्टैनबर्ग ने इस समझौते के वास्तविक आधार पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि इसे कोई टिकाऊ शांति समझौता मानना बड़ी भूल होगी, बल्कि यह आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को साधने के लिए तैयार किया गया मात्र 60 दिनों का एक अस्थायी युद्धविराम है। स्टैनबर्ग के अनुसार, वॉशिंगटन इस टकराव में अपने किसी भी मुख्य उद्देश्य को हासिल करने में नाकाम रहा है और इस आंशिक ढील से मिलने वाले भारी फंड का इस्तेमाल तेहरान अपने हिजबुल्ला और हूती जैसे आक्रामक प्रॉक्सी गुटों को पुनर्जीवित करने में करेगा, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम का खतरा जस का तस बना हुआ है।

    पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की चेतावनी और आत्मनिर्भरता की जरूरत

    दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी इस समझौते की स्थिरता को लेकर वैश्विक बिरादरी को सचेत किया है। ईरान को एक विनाशकारी सोच वाली सत्ता बताते हुए उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यह समझौता बेहद कमजोर बुनियाद पर टिका है जो कभी भी बिखर सकता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में वैश्विक आर्थिक आपूर्ति शृंखलाओं (सप्लाई चेन) को एक कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, इसलिए भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकतांत्रिक देशों को केवल पारंपरिक ईंधन तक सीमित न रहकर डेटा सुरक्षा, सबमरीन केबल्स और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी आत्मनिर्भरता को युद्धस्तर पर बढ़ाना होगा।

    हिंद-प्रशांत क्षेत्र का भविष्य और समझौते के क्रियान्वयन की कड़ी शर्तें

    स्कॉट मॉरिसन ने मौजूदा वैश्विक उथल-पुथल के बीच संतुलन साधने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी कूटनीति की सराहना की और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक राजनीति का नया धुरी केंद्र बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि इस क्षेत्र को किसी भी अधिनायकवादी ताकत के वर्चस्व से सुरक्षित रखने के लिए भारत-ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक भागीदारी बेहद निर्णायक साबित होगी। गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड में इस शुक्रवार को दोनों देश आधिकारिक रूप से इस दस्तावेज पर दस्तखत करने वाले हैं, हालांकि ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गारीबाबादी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा उनके फ्रीज किए गए फंड को जारी करने और आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने के बाद ही तेहरान मुख्य परमाणु वार्ता की मेज पर बैठेगा।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here