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    Homeराज्यमध्यप्रदेशपुराने किले को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान, जगदीशपुर में होगी डेस्टिनेशन कैबिनेट

    पुराने किले को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान, जगदीशपुर में होगी डेस्टिनेशन कैबिनेट

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी के समीप स्थित ऐतिहासिक स्थल जगदीशपुर में 'डेस्टिनेशन कैबिनेट' के आयोजन की प्रशासनिक तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर के प्राचीन किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की है। इस पुरातन धरोहर के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने और इसे राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार जल्द ही इस परिसर में अपनी कैबिनेट बैठक आयोजित करने जा रही है।

    सांस्कृतिक स्थलों पर बैठकों का सिलसिला

    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्रों को बढ़ावा देने की नीति के तहत यह अहम फैसला लिया गया है। इससे पहले इंदौर के प्रसिद्ध राजवाड़ा, दमोह के संग्रामपुर, खरगोन के ऐतिहासिक महेश्वर और वैश्विक पर्यटन स्थल खजुराहो में सफलतापूर्वक मंत्रिपरिषद की बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसी कड़ी में अब अगला गंतव्य भोपाल के पास स्थित जगदीशपुर को चुना गया है। संस्कृति विभाग की विशेष समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आला अफसरों को आयोजन रूपरेखा तैयार कर प्राथमिक व्यवस्थाएं जुटाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

    उच्च स्तरीय बैठक में तैयारियों की समीक्षा

    मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को निर्देशित किया है कि जगदीशपुर के ऐतिहासिक और सामरिक महत्व को देशव्यापी स्तर पर प्रचारित करने के लिए एक ठोस कार्ययोजना पर काम किया जाए। इस उच्च स्तरीय विमर्श के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव सहित संस्कृति और पुरातत्व विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी संबंधित विभागों को इस विशेष कैबिनेट बैठक की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और गरिमा के अनुकूल तमाम प्रबंध समय सीमा के भीतर मुकम्मल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    जगदीशपुर नामकरण और ऐतिहासिक गौरव

    यह स्थान अपने ऐतिहासिक घटनाक्रमों के लिए जाना जाता है। गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व में इस क्षेत्र का नाम 'इस्लाम नगर' से परिवर्तित कर पुनः इसका प्राचीन और मूल नाम 'जगदीशपुर' किया गया था। सरकार का मानना है कि इस ऐतिहासिक महत्व वाले स्थान पर कैबिनेट की बैठक आयोजित होने से न केवल इस क्षेत्र के सांस्कृतिक गौरव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि आने वाले दिनों में यहां पर्यटन की असीम संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे।

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