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    खजाने के लालच में टूटी आस्था, मूर्ति के टुकड़े कर चोरी का खुलासा

    जयपुर। गुलाबी नगरी के आमेर थाना अंतर्गत आने वाले साईवाड़ गांव के एक ऐतिहासिक ठाकुर लक्ष्मीनारायण मंदिर से चोरी हुई बेशकीमती अष्टधातु की प्रतिमा के मामले का पुलिस ने महज दो हफ्तों के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस प्रशासन ने एक मुख्य आरोपी को दबोचा है, जबकि उसके साथ शामिल एक नाबालिग को भी कानून के दायरे में लिया गया है। पकड़े गए मुख्य आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने एक खेत में खुदाई करवाकर खंडित की गई प्राचीन मूर्ति के अवशेषों को सफलतापूर्वक अपने कब्जे में ले लिया है।

    5 जून को हुई थी वारदात और आक्रोशित ग्रामीणों के बाद बनी एसआईटी

    घटनाक्रम के अनुसार, बीती 5 जून 2026 को मंदिर के मुख्य सेवादार रामजीलाल शर्मा ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी कि गर्भगृह से भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की करीब दो फीट ऊंची और अत्यंत प्राचीन अष्टधातु की मूर्ति गायब है। इस चोरी के बाद स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त गुस्सा भड़क उठा था, जिसके कारण इलाके में चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन भी हुए थे। धार्मिक संवेदनशीलता और मामले की अहमियत को देखते हुए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच टीम ने कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए मंदिर और उसके संपर्क मार्गों पर लगे लगभग 500 सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जांची तथा तकनीकी सेल की मदद से करीब 1000 मोबाइल नंबरों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) और टावर लोकेशन का गहन विश्लेषण किया।

    इंटरनेट पर खोजता था मूर्तियों के दाम और रत्नों के लालच में दिया वारदात को अंजाम

    वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब तफ्तीश आगे बढ़ी, तो पुलिस का शक गांव के ही कुछ स्थानीय युवकों पर गहरा गया। इसी आधार पर पुलिस ने साईवाड़ के रहने वाले 18 वर्षीय गणेश शर्मा को पकड़कर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपने एक कम उम्र के साथी के साथ मिलकर इस चोरी की बात कबूल कर ली। पुलिसिया पड़ताल में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी युवक पिछले काफी समय से इंटरनेट पर पुरानी मूर्तियों की तस्करी, उनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत और उनकी बनावट से जुड़े तथ्यों को खंगाल रहा था। उसे किसी ने यह अंधविश्वास घुसा दिया था कि इस सदियों पुरानी अष्टधातु की प्रतिमा के अंदर बेशकीमती नीलम या अन्य रत्न छिपे हो सकते हैं, और इसी अंधाधुंध लालच के फेर में आकर उसने गांव में बत्ती गुल होने का फायदा उठाकर मंदिर में सेंध लगा दी।

    ज्वार के खेत में टुकड़े-टुकड़े कर दफन किए अवशेष और तस्करों से संबंध की जांच

    चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मूर्ति को लेकर चुपके से गांव की सरहद पर स्थित अपने ज्वार के खेत में चला गया था। वहां उसने रत्न और कीमती धातुओं को तलाशने के चक्कर में भारी औजारों से मारकर प्राचीन प्रतिमा के कई टुकड़े कर डाले। जब उसे मूर्ति के भीतर से कुछ हासिल नहीं हुआ, तो वह घबरा गया और साक्ष्य मिटाने की नीयत से उसने उन खंडित हिस्सों को खेत की मिट्टी के नीचे गहरा दफन कर दिया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उक्त स्थान की खुदाई करवाकर मूर्ति के सभी टुकड़ों को साक्ष्य के तौर पर बरामद कर लिया है, और अब इस बिंदु पर भी सघन जांच की जा रही है कि कहीं इन आरोपियों के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय मूर्ति चोर गिरोह या तस्करों से तो नहीं जुड़े हैं।

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