अग्निकांड: अलीगंज की बहुमंजिला इमारत में मचा हाहाकार, कई छात्र झुलसे; मुख्यमंत्री ने जांच के दिए आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को एक बहुमंजिला इमारत में स्थित कोचिंग सेंटर और गेमिंग जोन में भीषण आग लग गई। इस हृदयविदारक हादसे में कोचिंग पढ़ने और एनीमेशन का कोर्स करने वाले 15 निर्दोष छात्रों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य छात्र गंभीर रूप से झुलस गए। जान बचाने के लिए इमारत की ऊपरी मंजिलों से नीचे कूदे 9 छात्र भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना अलीगढ़ का दौरा बीच में ही छोड़कर तुरंत वापस लौटे और सीधे घटनास्थल का मुआयना किया। वहीं, रक्षा मंत्री और स्थानीय सांसद राजनाथ सिंह भी दिल्ली से तुरंत रवाना हो गए हैं। प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट और एसी (एयर कंडीशनर) का कंप्रेसर फटने को आग लगने की मुख्य वजह माना जा रहा है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
यह पूरी घटना अलीगंज के पुरनिया इलाके की है। यहां स्थित एक तीन मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर (भूतल) पर एक पेट शॉप (पालतू जानवरों की दुकान) संचालित है। इसके ठीक ऊपर यानी पहली मंजिल पर पेट शॉप के मालिक का बड़ा वेयरहाउस (गोदाम) बना हुआ है। वहीं, इमारत की दूसरी मंजिल पर एक थ्री-डी एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और साथ ही 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं का कोचिंग सेंटर चलता था।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब ढाई बजे पहली मंजिल पर स्थित वेयरहाउस में अचानक चिंगारी भड़की और आग लग गई। वेयरहाउस में रखे सामान की वजह से आग ने चंद मिनटों में ही बेहद विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया।
भीतर ही फंसे रह गए मासूम छात्र, खिड़कियों से लगाई जान की भीख
देखते ही देखते आग की लपटें और जहरीला काला धुआं दूसरी व तीसरी मंजिल तक पहुंच गया, जिसके कारण वहां मौजूद छात्र और अन्य लोग भीतर ही बंधक बनकर रह गए। बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाने के कारण चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं और संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
हालांकि, जब तक दमकल कर्मी छात्रों तक पहुंच पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करीब दो घंटे से अधिक समय तक चले भारी राहत कार्य के बाद मलबे से 15 छात्रों के शव बाहर निकाले गए। अस्पताल में भर्ती कई झुलसे हुए छात्रों की हालत अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
दीवार तोड़ने में बीता कीमती समय, दमकल विभाग के दावों की खुली पोल
इस भयावह हादसे ने आपदा प्रबंधन और अग्निशमन विभाग के मुस्तैदी के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के दौरान हर एक सेकंड बेहद कीमती था, लेकिन इमारत में फंसे बच्चों को बाहर निकालने के लिए दमकल कर्मी काफी देर तक साधारण हथौड़ों से कंक्रीट की मजबूत दीवार को तोड़ने की नाकाम कोशिश करते रहे।
यदि अग्निशमन विभाग के पास आधुनिक हैमर ड्रिल मशीन जैसी बुनियादी व्यवस्था मौके पर होती, तो दीवार को कुछ ही मिनटों में ढहाकर कई मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आग लगने की सूचना देने के काफी देर बाद दमकल की गाड़ियां घटना स्थल पर पहुंचीं, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई।
मुख्यमंत्री के निर्देशों को विभाग ने किया हवा में गायब
गौरतलब है कि ठीक 15 दिन पहले दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड के तत्काल बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग को अत्याधुनिक ‘स्पेशलाइज्ड रेस्क्यू ग्रुप’ (एसआरजी) का गठन करने के कड़े निर्देश दिए थे। पहले चरण में लखनऊ सहित 15 प्रमुख जिलों में इस बल को तैनात करने की योजना कागजों पर तैयार भी की गई थी, लेकिन अलीगंज की इस घटना ने जमीनी हकीकत उजागर कर दी है।
सीएम ने पहले ही हिदायत दी थी कि दमकल विभाग का काम अब सिर्फ आग बुझाना नहीं, बल्कि बहुमंजिला इमारतों (हाईराइज बिल्डिंग्स) में जीवन और निवेश की सुरक्षा करना भी है। उन्होंने विशेष रूप से नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे महानगरों में बढ़ रही गगनचुंबी इमारतों के लिए आधुनिक फायर ऑडिट और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए थे, जिसे स्थानीय स्तर पर नजरअंदाज किया गया।
दौरा छोड़ मौके पर पहुंचे सीएम योगी, आला अधिकारियों को लगाई फटकार
हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक महत्वपूर्ण जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही उन्हें इस बड़े हादसे की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत अपना कार्यक्रम रद्द किया और लखनऊ पहुंचे। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश पर गृह प्रमुख सचिव संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण, डीजी फायर सुजीत पांडेय और पुलिस आयुक्त अमरेंद्र सेंगर सहित तमाम आला प्रशासनिक अधिकारियों ने सीधे मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।
मुख्यमंत्री ने इस गंभीर लापरवाही को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
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