More
    Homeराजनीतिबदलते राजनीतिक समीकरण: क्षेत्रीय दलों के संकट से कांग्रेस को कितना फायदा?

    बदलते राजनीतिक समीकरण: क्षेत्रीय दलों के संकट से कांग्रेस को कितना फायदा?

    कोलकाता। देश की राजनीति में इस समय बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट हो गई है और विधानसभा से लेकर संसद तक पार्टी दो हिस्सों में बंट चुकी है। दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए हैं, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। इन प्रमुख क्षेत्रीय दलों के कमजोर होने के बाद अब देश की राजनीति में यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या क्षेत्रीय पार्टियाँ खत्म हो रही हैं और यदि ऐसा है, तो इससे मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को क्या फायदा होगा?

    कांग्रेस को मिल सकता है बड़ा सियासी फायदा

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देश में क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने का सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में क्षेत्रीय दल ही मुख्य विपक्ष की भूमिका में हैं, जहाँ कांग्रेस को उनके सहारे की जरूरत पड़ती है। बीजेपी के बाद संसद में कांग्रेस ही सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके लोकसभा में 98 और राज्यसभा में 28 सांसद हैं। यदि क्षेत्रीय दल कमजोर पड़ते हैं, तो बंटा हुआ विपक्ष एक मंच पर आ सकता है। इससे जो वोटर बीजेपी के खिलाफ हैं, वे क्षेत्रीय दलों के बजाय सीधे कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे एंटी-बीजेपी (बीजेपी विरोधी) वोटों का बिखराव रुक जाएगा।

    राज्यों में संगठन मजबूत करने का मौका

    क्षेत्रीय दलों के दबदबे के कारण कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में सपा, बिहार में राजद, महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी और बंगाल में टीएमसी जैसी पार्टियों के सामने झुकना पड़ता है। इन राज्यों में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने पर कांग्रेस को सीट बंटवारे के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है और उसे कम सीटों पर संतोष करना पड़ता है। इतना ही नहीं, जीत के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भी इन्हीं क्षेत्रीय दलों के पास चली जाती है। ऐसे में यदि ये दल कमजोर होते हैं, तो कांग्रेस को इन राज्यों में अपने दम पर संगठन मजबूत करने, मुख्य विपक्षी दल बनने और भविष्य में अपनी सरकार बनाने का सीधा मौका मिलेगा।

    विपक्षी गठबंधन में बढ़ेगी कांग्रेस की ताकत

    क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने का एक बड़ा असर विपक्षी गठबंधन की राजनीति पर भी पड़ेगा। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विपक्षी दलों ने मिलकर एनडीए के खिलाफ 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन बनाया था, जिसका मकसद केंद्र की सत्ता से बीजेपी को हटाना था। इस गठबंधन में कई ताकतवर क्षेत्रीय दल शामिल थे, लेकिन समय के साथ आपसी मतभेदों के कारण यह गठबंधन लगभग टूट चुका है और कई दल इससे अलग हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यदि ये क्षेत्रीय पार्टियाँ आने वाले समय में और कमजोर होती हैं, तो विपक्षी खेमे में कांग्रेस इकलौती सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेगी और गठबंधन में उसकी मर्जी और मोलभाव करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here