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    क्या होने जा रहा है मंत्रिमंडल विस्तार? जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से बढ़ीं अटकलें

    नई दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के मंत्रिपरिषद से इस्तीफे के बाद मोदी सरकार के आगामी कैबिनेट फेरबदल और विस्तार को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। दरअसल, कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया था और भाजपा द्वारा उन्हें दोबारा उच्च सदन न भेजने के फैसले के बाद उनका इस्तीफा पहले से ही तय माना जा रहा था।

    इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे एक शिष्टाचार भेंट कहा गया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई है। यह फेरबदल आगामी संसद के मॉनसून सत्र से पहले होने की पूरी संभावना है।

    इन मंत्रियों की भी हो सकती है छुट्टी, 'एक व्यक्ति, एक पद' पर जोर

    कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट केवल जॉर्ज कुरियन तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के आंतरिक नीतिगत बदलावों और सांगठनिक नियुक्तियों के कारण कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:

    • रवनीत सिंह बिट्टू: जॉर्ज कुरियन की तरह ही केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है, जिससे उनका भी मंत्रिपरिषद से बाहर होना तय माना जा रहा है।

    • पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा: भाजपा के 'एक व्यक्ति, एक पद' के सिद्धांत के तहत इन दोनों नेताओं को केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। हाल ही में पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वर्तमान में ये क्रमशः वित्त और शहरी विकास मंत्रालयों के राज्य मंत्री हैं।

    • हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा: इन दोनों केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल भी इसी साल नवंबर में समाप्त हो रहा है, जिस पर पार्टी जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

    क्यों जरूरी हुआ यह फेरबदल? (मुख्य राजनीतिक समीकरण)

    • प्रशासनिक गति बढ़ाना: सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय की गई प्रशासनिक प्राथमिकताओं और रफ्तार के साथ तालमेल बिठाने में पीछे छूट रहे हैं। ऐसे मंत्रालयों में नई ऊर्जा फूंकने के लिए नए चेहरों को मौका दिया जाएगा।

    • शिंदे गुट का बढ़ता कद: उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसदों के पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना (NDA घटक) में शामिल होने के बाद एनडीए में इस गुट की ताकत बढ़ी है। राजनीतिक संतुलन साधने के लिए शिंदे गुट को कैबिनेट में अतिरिक्त हिस्सेदारी मिल सकती है।

    • पश्चिम बंगाल को बड़ा इनाम: हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में पश्चिम बंगाल के भीतर भाजपा को मिली अप्रत्याशित और शानदार जीत के बाद, इस बात की प्रबल संभावना है कि मोदी कैबिनेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व और मजबूत किया जाएगा।

    जॉर्ज कुरियन को मिल सकती है गवर्नर की जिम्मेदारी

    राजनीतिक गलियारों में मजबूत चर्चा है कि जॉर्ज कुरियन की संगठनात्मक निष्ठा को देखते हुए सरकार जल्द ही उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल (गवर्नर) नियुक्त कर सकती है। गौरतलब है कि आगामी जुलाई महीने में तीन प्रमुख राज्यों— कर्नाटक (थावरचंद गहलोत), मध्य प्रदेश (मंगूभाई पटेल) और उत्तराखंड (लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह) के राज्यपालों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। केरल में लंबे समय तक भाजपा कार्यालय का कामकाज संभालने वाले कुरियन को पीएम मोदी ने सीधे मंत्री पद के लिए चुनकर सबको चौंका दिया था।

    वरिष्ठ नेताओं को मिलेगी विदेशी दौरों पर राजदूत की कमान

    पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं को अब राजनयिक भूमिकाओं में भेजने की भी तैयारी चल रही है। इसी रणनीति के तहत हाल ही में भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश का उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि इस फेरबदल के बाद कुछ और वरिष्ठ चेहरों को विभिन्न देशों में राजदूत बनाकर भेजा जा सकता है।

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