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    सोनू निगम बोले- हर कोई सिंगर नहीं हो सकता, ऑटो-ट्यून पर दिया बड़ा बयान

    नई दिल्ली: वर्तमान संगीत युग में गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान 'ऑटो-ट्यून' (Auto-tune) तकनीक का उपयोग एक आम बात बन गई है, जिस पर संगीत प्रेमियों और जानकारों के बीच अक्सर यह बहस छिड़ी रहती है कि यह सही है या गलत। इस बीच, देश के जाने-माने और दिग्गज पार्श्व गायक (प्लेबैक सिंगर) सोनू निगम ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान खुलकर इस बात का खुलासा किया है कि आधुनिक समय में ऑटो-ट्यून क्यों जरूरी हो गया है और वह खुद भी अपने कुछ गानों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

    सोनू निगम ने एक हालिया बातचीत में यह स्वीकार किया है कि तकनीकी विकास और नए दौर के साथ गानों की रिकॉर्डिंग और निर्माण का पूरा तरीका बदल चुका है। यही वजह है कि उन्हें भी अपनी कई धुनों और गानों में ऑटो-ट्यून का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने उन अभिनेताओं (एक्टर्स) पर भी तीखा तंज कसा है, जो खुद प्रशिक्षित गायक न होने के बावजूद ऑटो-ट्यून के सहारे केवल गानों की रिकॉर्डिंग करवा रहे हैं।

    'मैं खुद भी अपने गानों में इस्तेमाल करता हूं ऑटो-ट्यून'

    इंटरव्यू के दौरान सोनू निगम ने कहा, "ऑटो-ट्यून के इस दौर ने निश्चित तौर पर संगीत उद्योग में भारी बदलाव किए हैं। लोग इसके बारे में कई तरह की नकारात्मक बातें करते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि जो भी हुआ, अच्छे के लिए हुआ। पुराने दिनों में हमें बिना किसी ऑटो-ट्यून के पूरी शुद्धता के साथ गाना पड़ता था, और हम खुद को बहुत भाग्यशाली मानते हैं कि हमने बिना इस तकनीक के रियाज किया है, जिसके कारण आज हमें इसकी बहुत अधिक निर्भरता की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद, मैं यह स्पष्ट रूप से कहूंगा कि मैं अपनी रिकॉर्डिंग में ऑटो-ट्यून का उपयोग करता हूं।"

    गानों में क्यों जरूरी हो गई है यह तकनीक?

    ऑटो-ट्यून की अनिवार्यता को समझाते हुए सोनू निगम ने आगे बताया, "आजकल संगीत की दुनिया में सब कुछ 440 (स्टैंडर्ड पिच) पर आधारित हो गया है। पहले के समय में हर रिकॉर्डिंग पूरी तरह लाइव होती थी। हमारे पास स्टूडियो में लाइव सारंगी, लाइव वाद्य यंत्र और लाइव स्ट्रिंग्स होते थे, इसलिए उस समय हमारी आवाज की पिच का बिल्कुल परफेक्ट होना अनिवार्य नहीं होता था।

    लेकिन आज के समय में सब कुछ पूरी तरह से डिजिटाइज्ड हो चुका है। अब हर एक चीज एक सीधी और सटीक डिजिटल लाइन पर चलती है, और यदि ऐसे में आपकी आवाज बिल्कुल रॉ (कच्ची और बिना प्रोसेस की हुई) रहेगी, तो वह इस आधुनिक संगीत के साथ बेमेल और अजीब सुनाई देगी। पहले लाइव म्यूजिक के साथ हमारे स्वर उसके अनुकूल ढल जाते थे, लेकिन आज तकनीक बदल चुकी है।"

    एक्टर्स द्वारा ऑटो-ट्यून के इस्तेमाल पर बोले सोनू निगम

    सोनू निगम ने उन लोगों या कलाकारों का बिल्कुल समर्थन नहीं किया जो केवल ऑटो-ट्यून और मशीनी साजो-सामान के दम पर अपने गाने तैयार करते हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम उन लोगों की आवाज या बेसुरेपन को सुधारने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल न करें जो वास्तव में गाना नहीं जानते।

    आप अपनी तरफ से अपना 99 प्रतिशत प्रयास देते हैं, और ऑटो-ट्यून आपके उस हुनर को थोड़ा सा संवारकर 100 प्रतिशत तक ले जाता है। आज कल कई अभिनेता अपनी फिल्मों या शौक के लिए गानों में ऑटो-ट्यून का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं; यदि वे अपने कलात्मक सपनों को पूरा करने के लिए ऐसा करते हैं, तो इसमें कोई हर्ज नहीं है और यह बिल्कुल ठीक है। लेकिन, वे कभी भी पेशेवर गायकों की जगह नहीं ले सकते।"

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