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    ‘बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं चलेगा’, हिंदी मीडियम बंद करने पर नाराजगी

    जबलपुर कटंगा स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल में हिंदी माध्यम की कक्षाएं बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ बुधवार को अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। स्कूल परिसर में जुटे दर्जनों माता-पिता ने प्रबंधन की इस मनमानी पर जमकर नाराजगी जताई। अभिभावकों का तर्क था कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही वे बच्चों के लिए यूनिफॉर्म और महंगी किताबें खरीद चुके हैं। ऐसे में बीच मंझधार में लिया गया यह फैसला बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा।

    अचानक जारी हुआ फरमान, टीसी लेने का बनाया दबाव

    केंट बोर्ड द्वारा संचालित इस हायर सेकंडरी स्कूल में अचानक यह निर्देश जारी कर दिया गया कि कक्षा 6वीं से 9वीं तक के हिंदी मीडियम के विद्यार्थियों को केंट बोर्ड के लाल स्कूल या गोराबाजार स्कूल में ट्रांसफर कर दिया जाए, अथवा वे अपनी टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) ले लें। इस तुगलकी आदेश से अभिभावक हैरान रह गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जय महाकाल संघ अंतरराष्ट्रीय बजरंग दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कन्हैया रामकृष्ण तिवारी ने स्कूल प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के मासूम बच्चों के भविष्य के साथ ऐसा अन्याय कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बच्चों की पढ़ाई इसी स्कूल में नियमित रखने की मांग की और ऐसा न होने पर बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन व पास्को एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की बात कही।

    हजारों रुपये की किताबें खरीदीं, सीबीएसई के फॉर्म भी भरवाए

    अभिभावकों ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने इसी साल अप्रैल महीने में बच्चों से सीबीएसई (CBSE) के फॉर्म भी भरवा लिए थे। इसके बाद सभी पालकों ने हजारों रुपये खर्च करके नई किताबें और कॉपियां भी खरीद ली थीं। कई लोग ड्रेस भी लेने की तैयारी में थे, तभी अचानक यह फरमान सुना दिया गया। अभिभावकों के बढ़ते आक्रोश और आंदोलन की चेतावनी को देखते हुए मौके पर पहुँचे स्कूल के वरिष्ठ अधिकारी ने तुरंत बीच-बचाव किया। उन्होंने पालकों को आश्वस्त किया कि बच्चों को कहीं नहीं भेजा जाएगा और उनकी पढ़ाई यहीं जारी रहेगी, जिसके बाद जाकर मामला शांत हुआ।

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