कठूमर में भाषा समर कैंप, खेल-खेल में संस्कृति सीख रहे छात्र
कठूमर। उपखंड के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बेरका में शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय भारतीय भाषा समर कैंप के पांचवें दिन विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शिक्षाप्रद एवं रोचक गतिविधियों का आयोजन किया गया। यह शिविर 28 जून तक संचालित रहेगा और इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को खेल-खेल में भारतीय भाषाओं एवं संस्कृति से जोड़ना है।
कैंप प्रभारी सुरेश चंद जैन ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप आयोजित इस विशेष शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं और भारतीय सांकेतिक भाषा के बुनियादी संवाद कौशल से परिचित कराना है। इससे बच्चों में “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को बढ़ावा मिलेगा तथा राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ मजबूत होगी।
खेल-खेल में सीखने की अनूठी पहल
समर कैंप को इस प्रकार तैयार किया गया है कि विद्यार्थी बिना किसी दबाव के मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से नई भाषाओं और सांस्कृतिक विविधताओं को समझ सकें। खेल, समूह गतिविधियों और संवाद आधारित अभ्यासों के जरिए बच्चों को सीखने का अवसर दिया जा रहा है।
सात दिवसीय पाठ्यक्रम में विविध गतिविधियां
कैंप के दौरान विद्यार्थियों को विभिन्न भारतीय भाषाओं की वर्णमाला, संख्याएं और दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले सामान्य वाक्यों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही भारतीय सांकेतिक भाषा का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिले और दिव्यांग एवं सामान्य विद्यार्थी बेहतर संवाद स्थापित कर सकें।
इसके अलावा विभिन्न राज्यों की लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यंजन, लोक नृत्य, संगीत और स्थानीय इतिहास से भी विद्यार्थियों को परिचित कराया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान विकसित करना है।
वर्कशीट, क्विज और रोल-प्ले से बढ़ रहा आत्मविश्वास
कैंप में वर्कशीट, क्विज, रोल-प्ले और समूह आधारित अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। शिक्षकों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे नई भाषाओं को सहज रूप से सीख सकेंगे।
अभिभावकों और ग्रामीणों ने की सराहना
स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिविर बच्चों में बहुभाषी क्षमता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में भी सहायक सिद्ध होंगे।
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