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    जबलपुर के भंवरताल उद्यान में गंदे पानी से उठी दुर्गंध, लोगों ने जताई नाराजगी

    जबलपुर: संस्कारधानी की पहचान और शहर के मुख्य आकर्षणों में शुमार भंवरताल उद्यान इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और घोर अव्यवस्था का शिकार होकर रह गया है। पार्क के भीतर फैली भीषण गंदगी और बदइंतजामी के चलते यहां आने वाले स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उद्यान की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लाखों रुपये की भारी-भरकम लागत से स्थापित किए गए हाई-टेक म्यूजिकल फव्वारे (Musical Fountain) तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़े हैं। देखरेख के अभाव में इन फव्वारों के भीतर जमा पानी अब पूरी तरह सड़ चुका है, जिससे उठने वाली भयंकर बदबू के कारण लोगों का उद्यान परिसर में चंद मिनट भी ठहरना दूषित हवा के कारण दूभर हो गया है। हाल ही में जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में यह कड़वी हकीकत सामने आई है कि नियमित सफाई न होने के कारण फाउंटेन के पानी में मोटी काई जम चुकी है, जिससे पूरे पार्क का स्वरूप और सौंदर्य नष्ट हो रहा है।

    नियमित रूप से सुबह की सैर पर आने वाले जागरूक नागरिक दीपेश कुमार ने अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अब भंवरताल उद्यान में आना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि सड़े हुए पानी की दुर्गंध सिरदर्द पैदा कर देती है। इस गंभीर नागरिक समस्या पर अपना पक्ष रखते हुए उद्यान विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मनीष तड़से ने सफाई दी है कि पार्क की स्वच्छता को लेकर मैदानी कर्मचारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि पानी की निकासी के लिए पंप भी स्थापित कर दिया गया है और तकनीकी खराबी को जल्द से जल्द दूर कर व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी।

    मेंटेनेंस के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रही सरकारी संपत्ति

    एक दौर में भंवरताल उद्यान की शान कहे जाने वाले रंग-बिरंगे म्यूजिकल फव्वारे आज विभागीय लापरवाही का जीता-जागता सबूत बन चुके हैं। लंबे समय से बंद पड़े होने के कारण इन फाउंटेन के भीतर ठहरा हुआ पानी अब केवल गंदगी ही नहीं, बल्कि जानलेवा संक्रामक बीमारियों और लार्वा का मुख्य केंद्र बन गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि जो लोग सुकून के पल बिताने यहां आते हैं, उन्हें नाक पर रुमाल रखकर गुजरना पड़ रहा है।

    समय पर उचित मेंटेनेंस और टेक्निकल ऑडिट न किए जाने की वजह से जनता के टैक्स के पैसों से खरीदी गई लाखों रुपये की कीमती मशीनें जंग खाकर धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। क्षेत्रीय जनता का साफ कहना है कि यदि नगर निगम प्रशासन ने इस दिशा में तुरंत कोई ठोस और सुधारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आने वाले कुछ ही दिनों में शहर का यह प्रमुख पर्यटन स्थल पूरी तरह से खंडहर और अनुपयोगी साबित होने लगेगा। हालांकि अधिकारी हर बार की तरह सिर्फ कागजी आश्वासन दे रहे हैं, परंतु धरातल पर सुधार की स्थिति शून्य बनी हुई है।

    अधिकारियों की अनदेखी से संकट में शहर की विरासत, मॉर्निंग वॉकर्स में भारी आक्रोश

    भंवरताल उद्यान सिर्फ एक आम पार्क नहीं, बल्कि जबलपुर शहर की एक ऐतिहासिक धरोहर है, लेकिन वर्तमान समय में यह जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर एक बड़ा दाग बन गया है। फव्वारों के कुंड में महीनों से जमा स्थिर पानी न केवल हवा को प्रदूषित कर रहा है, बल्कि भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में मच्छरों को पनपने के लिए सबसे सुरक्षित नर्सरी प्रदान कर रहा है। इससे आस-पास के रिहायशी इलाकों में डेंगू और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों के फैलने की आशंका काफी प्रबल हो गई है।

    प्रशासन द्वारा सफाई को लेकर किए जा रहे तमाम बड़े-बड़े वादे और दावे केवल फाइलों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं, क्योंकि उद्यान के हर हिस्से में कचरे और उपेक्षा के ढेर दिखाई दे रहे हैं। इस दुर्दशा को देखकर प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक पर आने वाले शहर के वरिष्ठ नागरिकों में नगर निगम के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इतनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील जगह को पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया है। नागरिकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सिर्फ एक पंप लगा देने की खानापूर्ति से इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं होने वाला, इसके लिए एक मजबूत कार्ययोजना, नियमित वैज्ञानिक सफाई और जवाबदेही तय करने की तत्काल आवश्यकता है।

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