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    उज्जैन महाकाल में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, दो प्रवेश द्वारों से होंगे दर्शन

    उज्जैन:श्रावण मास के दौरान विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए इस बार उज्जैन प्रशासन ने बेहद खास और भव्य तैयारियां की हैं। हर साल उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए इस बार महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भक्तों को प्रवेश देने के लिए दो अलग-अलग रास्तों की व्यवस्था की गई है। इसके तहत श्रद्धालुओं को एक एंट्री पहले की तरह 'श्री महाकाल महालोक' से मिलेगी, जबकि दूसरा नया मुख्य गेट 'हरसिद्धि चौराहा' से तैयार किया गया है। प्रशासन की इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरी भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा नहीं होगी और भक्तों की आवाजाही बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलती रहेगी।

    वीकेंड पर 7 लाख श्रद्धालुओं का अनुमान, 40 मिनट में मिलेंगे दर्शन

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस पवित्र महीने के दौरान सामान्य दिनों में प्रतिदिन 3 से 4 लाख और शनिवार-रविवार (वीकेंड) के दिनों में यह संख्या 5 से 7 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच सकती है। इसी भारी आमद को ध्यान में रखते हुए रास्तों को पहले से ही पूरी तरह व्यवस्थित और चौड़ा कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि इन नए बदलावों के बाद अब श्रद्धालुओं को कतार में लगने के बाद महज 40 मिनट के भीतर बाबा महाकाल के दर्शन मिल सकेंगे, जो कि पहले के सालों में काफी ज्यादा समय लेता था। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होगी, बल्कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी बिना किसी परेशानी के दर्शन करने में आसानी होगी।

    विक्रम टीले के पास बनीं अत्याधुनिक सुविधाएं, श्रद्धालुओं का बंटेगा दबाव

    श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान भीड़ नियंत्रण को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए पूरे रूट पर भक्तों की सहूलियत के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। विक्रम टीले के आसपास के क्षेत्र में लड्डू प्रसाद काउंटर, शीघ्र दर्शन (वीआईपी) टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र और खोया-पाया केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं स्थापित की गई हैं। हरसिद्धि चौराहा से एंट्री शुरू होने के कारण भक्तों का फ्लो दोनों तरफ बराबर बंटा रहेगा। प्रशासन का पूरा फोकस इस बात पर है कि किसी भी एक गेट या मार्ग पर अचानक दबाव न बने। इस बार का मैनेजमेंट मॉडल इस तरह तैयार किया गया है कि श्रद्धा और सुरक्षा का बेहतरीन तालमेल देखने को मिले।

    3 अगस्त से शुरू होंगी सवारियां, भस्म आरती के समय में भी हुआ बड़ा बदलाव

    श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर की सबसे प्रमुख और भव्य पहचान भगवान महाकाल की शाही सवारी होती है। इस बार 3 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर तक कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें से अंतिम सवारी अपने पूरे राजसी वैभव और स्वरूप में निकलेगी। हर सोमवार को निकलने वाली इस सवारी को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग उज्जैन की सड़कों पर उमड़ते हैं। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए भस्म आरती के समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। श्रावण के दौरान हर रविवार को रात ढाई (2:30) बजे ही मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे, जबकि सप्ताह के बाकी दिनों में तड़के तीन (3:00) बजे पट खुलेंगे। आम दिनों में यह समय सुबह 4 बजे का होता है, लेकिन समय से पहले पट खुलने से ज्यादा से ज्यादा भक्तों को भस्म आरती और दर्शन का लाभ मिल सकेगा।

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