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    ये विकास नहीं है, ये इवेंट मैनेजमेंट की तानाशाही, फिर विकास का ढोल पीटा और विरोध पर ताला लगवा दिया- जूली

    नेता प्रतिपक्ष बोले- हकीकत जाननी है तो अधिकारियों और भाजपा नेताओं के बजाय आमजन से करें सीधा संवाद; अरावली विकास, सरिस्का, डेयरी, मेट्रो और सड़क जैसे मुद्दे उठाए

    अलवर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे को लेकर भाजपा और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह की सभा से पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया गया।

    जूली ने कहा कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास के कार्यक्रम के बीच विपक्षी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार की कथित दमनकारी नीति के आगे नहीं झुकेंगे।

    ‘यह विकास नहीं, इवेंट मैनेजमेंट की तानाशाही’

    टीकाराम जूली ने कहा कि अलवर में भाजपा ने एक बार फिर विकास का ढोल पीटा है, लेकिन विरोध करने वालों पर कार्रवाई की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने के साथ विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की गई।

    जूली ने कहा कि बोलने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की आजादी लोकतंत्र का हिस्सा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी मांगें रखने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रयास कर रहे थे।

    अमित शाह से आमजन से संवाद करने की अपील

    नेता प्रतिपक्ष ने अमित शाह के अलवर दौरे के दौरान जिले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए आम लोगों से सीधे संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि गृहमंत्री अलवर की हकीकत जानना चाहते हैं तो उन्हें केवल भाजपा नेताओं और अधिकारियों से जानकारी लेने के बजाय आमजन से बातचीत करनी चाहिए।

    जूली ने अलवर से जुड़े मेट्रो, हवाई अड्डा, सैनिक स्कूल, अरावली और सरिस्का सहित विभिन्न मुद्दों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर जिले के लोगों की अपेक्षाएं और समस्याएं सीधे जनता से सुननी चाहिए।

    डेयरी के बढ़ते कर्ज पर उठाए सवाल

    जूली ने अलवर स्थित डेयरी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस डेयरी को लेकर भाजपा नेता उपलब्धियों का प्रचार कर रहे हैं, उस पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि डेयरी से जुड़े वित्तीय मामलों का असर किसानों और दुग्ध उत्पादकों पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से दुग्ध उत्पादकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए डेयरी की वित्तीय स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

    अरावली और सरिस्का के मुद्दे पर सरकार को घेरा

    नेता प्रतिपक्ष ने अरावली पर्वतमाला और सरिस्का के महत्वपूर्ण बाघ आवास क्षेत्र में संभावित बदलाव से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के पर्यावरणीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है।

    जूली ने कहा कि अरावली की परिभाषा में बदलाव का प्रभाव वन, वन्यजीव, भूजल और पर्यावरण पर पड़ सकता है। उन्होंने सरिस्का बाघ अभयारण्य के महत्वपूर्ण बाघ आवास क्षेत्र से जुड़े बदलावों में पारदर्शिता की आवश्यकता बताई।

    उन्होंने कहा कि सरिस्का अलवर की पहचान है और इसके संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के हितों तथा पर्यावरणीय संतुलन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

    विपक्ष की आवाज दबाने का लगाया आरोप

    टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि अमित शाह के दौरे से पहले कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा नजरबंद या हिरासत में लिया गया। उन्होंने इसे विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया।

    उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का अधिकार है। सरकार को विपक्ष की आवाज दबाने के बजाय उसे सुनना चाहिए।

    ‘पहले भर्तृहरि के दर्शन करते, फिर जनता से बात करते’

    जूली ने कहा कि अमित शाह को अलवर आने पर सबसे पहले बाबा भर्तृहरि के दर्शन करने चाहिए थे और इसके बाद अधिकारियों की गाड़ियों के बजाय आम लोगों के बीच जाकर जिले की स्थिति देखनी चाहिए थी।

    उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हैं। उनके अनुसार अलवर की वास्तविक तस्वीर सरकारी फीडबैक या अधिकारियों की रिपोर्ट से नहीं, बल्कि जनता से सीधे संवाद करने पर सामने आएगी।

    जूली ने कहा कि अलवर की वास्तविक स्थिति समझने के लिए रिक्शा चालकों, किसानों और दुग्ध उत्पादकों से बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आमजन की समस्याएं सीधे नहीं सुनी गईं तो दौरा केवल कार्यक्रम, तस्वीर और वापसी तक सीमित रह जाएगा।

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