More
    Homeराज्यबिहाररेलवे ओवरब्रिज पर बवाल, पूर्णिया के कारोबारियों ने सरकार के खिलाफ खोला...

    रेलवे ओवरब्रिज पर बवाल, पूर्णिया के कारोबारियों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

    पूर्णिया: रेल मंत्रालय द्वारा कटिहार और पूर्णिया रेलवे जंक्शन के बीच स्थित 13 नंबर रेलवे फाटक (गुमटी) पर बनाए जाने वाले प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को लेकर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध शुरू हो गया है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के खिलाफ क्षेत्र के व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर तीखा विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। लगभग 44.88 करोड़ रुपये की भारी-भरकम बजट राशि से मंजूर हुई इस सरकारी योजना को लेकर स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि वे किसी भी तरह से क्षेत्र के आधुनिक विकास के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उनका आरोप है कि बिना किसी पुख्ता और व्यावहारिक धरातलीय सर्वेक्षण के जनता पर थोपा जा रहा यह आधा-अधूरा ओवरब्रिज शहर के मुख्य और फलते-फूलते बाजार को पूरी तरह से तहस-नहस कर देगा।

    बेलौरी बाजार पर मंडराया विस्थापन का खतरा, हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट

    स्थानीय नागरिक संगठनों और मुख्य व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने इस मामले पर एक सुर में चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि इस ओवरब्रिज के निर्माण की वजह से बेलौरी क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक केंद्र पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। पुल की जद में आने के कारण यहाँ सालों से जमे हजारों छोटे दुकानदारों, पटरी व्यवसायों, खुदरा विक्रेताओं और रोज कमाकर खाने वाले दिहाड़ी मजदूरों के सामने सीधे तौर पर अपना आशियाना और रोजगार छिनने का डर पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अगर बिना सोचे-समझे इस योजना को जबरन आगे बढ़ाया गया, तो प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर रूप से भरण-पोषण और भुखमरी की नौबत आ जाएगी, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    एनएच फोरलेन की मंदी से अभी उबरे भी नहीं थे कि सरकार ने दे दिया एक और जख्म

    इलाके के कारोबारियों ने अपनी पुरानी दिक्कतों का हवाला देते हुए बताया कि इससे पहले राष्ट्रीय राजमार्ग 131-ए के फोरलेन निर्माण कार्य के समय भी इस पूरे क्षेत्र का व्यापार लंबे समय तक मंदी की चपेट में रहा था और कई दुकानदारों को भारी नुकसान और विस्थापन का दंश झेलना पड़ा था। पुराना घाव अभी पूरी तरह भरा भी नहीं था कि अब इस नए निर्माण कार्य से बची-कुची स्थानीय अर्थव्यवस्था की भी पूरी तरह से कमर टूट जाएगी। व्यापारिक संघों ने जिला प्रशासन और रेल विभाग से पुरजोर मांग की है कि किसी भी तरह की निर्माण गतिविधि शुरू करने से पहले यहाँ के जमीनी हालात को समझा जाए और छोटे दुकानदारों के पुनर्वास व उनके सुरक्षित भविष्य को लेकर कोई ठोस नीति बनाई जाए।

    करोड़ों रुपये की फिजूलखर्ची का आरोप, ट्रैफिक जाम की समस्या को बताया नाममात्र

    मामले को लेकर क्षेत्र के प्रबुद्ध और जिम्मेदार नागरिकों ने भी कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि इस समय 13 नंबर रेलवे गुमटी पर यातायात का ऐसा कोई भयावह या गंभीर संकट मौजूद ही नहीं है, जिसके समाधान के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई के 44.88 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाकर ओवरब्रिज का निर्माण किया जाए। लोगों का मानना है कि इस योजना पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने की बजाय रेलवे और स्थानीय प्रशासन को जनहित में अन्य जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि सरकारी धन का सही इस्तेमाल हो सके और जनता की आजीविका भी सुरक्षित बनी रहे।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here