नई दिल्ली। भारत में सदियों पुरानी और कुप्रथा मानी जाने वाली दहेज प्रथा को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर आम गलियारों तक बहस बेहद तेज हो गई है। इस बार यह चर्चा एक उच्च शिक्षित महिला रेडियोलॉजिस्ट (डॉक्टर) की भावुक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुई है, जो अब तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रही है। डॉक्टर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर अपने विवाह के लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश के दौरान कथित तौर पर झेली गई दहेज की अमानवीय मांगों का दर्द बयां किया है। महिला डॉक्टर का चौंकाने वाला दावा है कि शादी की बातचीत के दौरान कुछ परिवारों ने उनसे 50 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम दहेज की मांग कर डाली, जबकि एक अन्य परिवार ने तो उनके माता-पिता की कुल संपत्ति में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी तक की शर्त रख दी।
कानूनी पाबंदी के बावजूद समाज में बरकरार है कुप्रथा
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में दहेज लेना और देना दोनों ही कानूनन गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं। इसके सख्त नियमों के बावजूद देश के तमाम हिस्सों से समय-समय पर दहेज उत्पीड़न और शादी के नाम पर सौदेबाजी के आरोप सामने आते रहते हैं। हालांकि, इस विशिष्ट मामले में महिला डॉक्टर द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि या सत्यापन नहीं किया जा सका है, क्योंकि संबंधित परिवारों की ओर से अब तक इस पर कोई सार्वजनिक सफाई या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन इस एक पोस्ट ने यह जरूर साबित कर दिया है कि आधुनिक और शिक्षित समाज में भी यह कुप्रथा किस कदर अपनी जड़ें जमाए बैठी है।
सफल और आत्मनिर्भर होने के बाद भी मानसिक प्रताड़ना
ऑनलाइन साझा किए गए अपने संदेश में महिला डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने रेडियोडायग्नोसिस में एमडी (MD) की उच्च डिग्री हासिल की है और वे पेशेवर रूप से पूरी तरह स्थापित हैं। वे अपनी तीन बहनों में सबसे बड़ी हैं और आर्थिक रूप से इतनी आत्मनिर्भर हैं कि अपने पूरे परिवार की देखभाल अकेले करने में सक्षम हैं। उन्होंने लिखा कि इतनी बड़ी प्रोफेशनल उपलब्धियों और योग्यताओं के बावजूद, सिर्फ अपनी संकीर्ण सोच के कारण दूल्हे के परिवारों ने जो मांगें रखीं, उसने उनके लिए जीवनसाथी ढूंढने के सफर को भावनात्मक और मानसिक रूप से बेहद थका देने वाला और कड़वा अनुभव बना दिया है।
संपत्ति में हिस्सेदारी की अजीबो-गरीब शर्तें
अपनी आपबीती बताते हुए महिला डॉक्टर ने लिखा कि एक रसूखदार परिवार ने तो सीधे 50 करोड़ रुपये की मांग की। वहीं, एक दूसरे परिवार ने उनके सामने यह अजीबोगरीब शर्त रख दी कि चूंकि होने वाले दूल्हे का भाई भी एक डॉक्टर है, इसलिए उन्हें अपनी पारिवारिक प्रॉपर्टी का 10 प्रतिशत हिस्सा 'आदापडुचु कट्नम' (एक पारंपरिक उपहार, जो असल में दहेज प्रथा का ही एक रूप है) के तौर पर देना होगा। इन अनुचित और अनैतिक मांगों ने उनके माता-पिता को भारी मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव में डाल दिया, जो अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित थे। हालांकि, उन्होंने गर्व से यह भी जोड़ा कि उनके माता-पिता ने इस सामाजिक दबाव के आगे घुटने नहीं टेके और उन्हें ऐसे लालची परिवारों में शादी के लिए मजबूर नहीं किया।
सोशल मीडिया पर मिला भारी समर्थन, व्यवस्था पर उठे सवाल
तीन बेटियों के पिता होने के नाते उनके परिवार को इस तरह के माहौल में रिश्ता तलाशने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है, इसका जिक्र करते हुए डॉक्टर ने अंत में एक बेहद तीखा सवाल उठाया कि "क्या हम इस समाज से दहेज प्रथा को कभी खत्म नहीं कर पाएंगे?" इस पोस्ट के वायरल होने के बाद हजारों सोशल मीडिया यूजर्स डॉक्टर के समर्थन में आ गए हैं। लोगों ने इतनी मोटी रकम की मांग पर गहरी हैरानी और नाराजगी जताई है। कुछ यूजर्स ने उन्हें सलाह दी कि वे डॉक्टरों के संकीर्ण दायरे से बाहर निकलकर किसी अन्य मानवीय पेशे के जीवनसाथी की तलाश करें, जबकि अधिकांश लोगों का मानना है कि अब समय आ गया है जब कानून के साथ-साथ समाज को भी ऐसे लालची लोगों का पूरी तरह सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए।


