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    विदेशी MBBS डिग्री की आड़ में फर्जीवाड़ा, SOG ने दबोचे तीन डॉक्टर

    जयपुर। राजस्थान में फर्जी एफएमजी (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) स्क्रीनिंग सर्टिफिकेट मामले में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर लौटे तीन और डॉक्टरों को एसओजी ने गिरफ्तार किया है। पुलिस की गहराई से की गई जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये तीनों डॉक्टर एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा में बार-बार फेल हो रहे थे। परीक्षा पास न कर पाने के कारण इन्होंने शॉर्टकट अपनाया और लाखों रुपये फूंक कर फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट तैयार करवा लिए। इन्हीं जाली दस्तावेजों के दम पर इन्होंने न सिर्फ राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में अपना रजिस्ट्रेशन कराया, बल्कि राज्य के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में अपनी इंटर्नशिप भी पूरी कर ली। एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल ने बताया कि इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए जयपुर एसओजी थाने में दर्ज मामला संख्या 08/26 के तहत तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

    लाखों की घूस और किर्गिस्तान-कजाकिस्तान का कनेक्शन

    इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे दलालों का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था, जिसने अभ्यर्थियों से २५ लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूली। पकड़े गए आरोपियों में बांसवाड़ा का रहने वाला नवदीप तंबोलिया, प्रतापगढ़ का चिराग साहु और दौसा का आफरीदी खान शामिल है। इनमें से नवदीप ने किर्गिस्तान से डॉक्टरी की पढ़ाई की थी, जबकि चिराग और आफरीदी ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री ली थी। जब ये भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाए, तो इन्होंने दलालों से संपर्क साधा। नवदीप और आफरीदी ने शुभम गुर्जर नाम के दलाल को २५-२५ लाख रुपये दिए, जबकि चिराग ने विकास यादव नाम के बिचौलिए को साढ़े २३ लाख रुपये देकर नकली पासिंग सर्टिफिकेट खरीदे।

    सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में सेंधमारी

    इन जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर इन आरोपियों ने व्यवस्था की आंखों में धूल झोंकी और राज्य के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर बनकर इंटर्नशिप शुरू कर दी। नवदीप तंबोलिया ने राजकीय मेडिकल कॉलेज दौसा में अपनी सेवाएँ दीं, तो चिराग साहु ने उदयपुर के पैसिफिक मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी कर ली। इसी तरह आफरीदी खान ने भी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज अलवर से अपनी इंटर्नशिप निकाल ली। हैरान करने वाली बात यह है कि बिना योग्यता के ये आरोपी मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने की दहलीज पर पहुंच चुके थे।

    १०० से ज्यादा संदिग्ध रडार पर, कोर्ट ने भेजा रिमांड पर

    एसओजी की इस कार्रवाई से पूरे चिकित्सा महकमे में हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि जांच की आंच अब १०० से अधिक संदिग्ध विदेशी मेडिकल स्नातकों तक पहुंच चुकी है। यह घोटाला कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसओजी इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार, यूडीसी और एलडीसी सहित कुल २५ मददगारों को पहले ही जेल की सलाखों के पीछे भेज चुकी है। मुख्य आरोपी भानाराम माली, शुभम गुर्जर और इन्द्रराज गुर्जर पर करोड़ों रुपये का यह रैकेट चलाने का आरोप है। फिलहाल गिरफ्तार किए गए तीनों नए डॉक्टरों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें ४ जुलाई २०२६ तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एसओजी अब इनसे पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह से जुड़े बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

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