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    शुरू हो चुका है आषाढ़…खुल जाएंगे सभी बंद पड़े रास्ते, इस विधि से करें भोलेनाथ की पूजा

    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार संवत का चातुर्मास भोलेनाथ को समर्पित होता है. ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से आषाढ़ मास की पहली तिथि से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है, जो आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक चलता है. आषाढ़ मास का प्रारंभ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से हो चुका है. इसमें भोलेनाथ की आराधना, पूजा पाठ आदि करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है. चातुर्मास में भोलेनाथ की विशेष मंत्रों से साधना करने, उनका जलाभिषेक, स्तोत्र, शिव पुराण आदि का जाप सुबह और शाम के समय करने से तरक्की में आ रही सभी बाधाएं खत्म हो जाती हैं. भोलेनाथ के भक्तों के मन में सबसे पहले सवाल यही आता है कि आषाढ़ माह से शुरू होने वाले चातुर्मास में भोलेनाथ को किस विधि से प्रसन्न करें जिसे उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएं और जीवन सुखमय हो? चलिए विस्तार से जानते हैं.

    हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री लोकल 18 से बताते हैं कि ज्येष्ठ मास के बाद आषाढ़ मास का आगमन होता है. मास कृष्ण पक्ष की पहली तिथि से चातुर्मास भी शुरू हो जाता है. चातुर्मास में 4 माह होते हैं जबकि पक्ष आठ होते हैं. चातुर्मास भगवान शिव को समर्पित समय है. चातुर्मास में ही भोलेनाथ के निमित्त कावड़ यात्रा होती है. ज्योतिषी गणना के अनुसार, चातुर्मास मास में भोलेनाथ ही पूरी सृष्टि का संचालन करते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष में होने वाली एकादशी से भगवान विष्णु समेत सभी देव सो जाते हैं.
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    पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि चातुर्मास में भोलेनाथ को प्रसन्न करने के अनेक उपायों का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में है. शिव पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में भोलेनाथ को प्रसन्न करने के अनेक मंत्रों, स्तोत्र आदि के बारे में बताया गया है. सुबह ओर सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में भोलेनाथ का रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करने से भोलेनाथ साधकों से प्रसन्न हो जाते हैं. भोलेनाथ से मनवांछित फल पाने के लिए रुद्राष्टक, शिव तांडव, शिव महिम्न, पशुपत्येष्टक आदि कई स्तोत्र का पाठ श्रद्धा भक्ति भाव से भोलेनाथ के सिद्ध पीठ स्थल या घर में स्थित देवालय में बैठकर करने से लाभ होता है. इससे शिव धाम के द्वार खुल जाते है. चातुर्मास के समय में भोलेनाथ को प्रसन्न करना बेहद आसान होता है.

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