भरतपुर विकास को लेकर सीताराम गुप्ता ने रखा विजन, शिक्षा, कृषि और पर्यटन को बताया भविष्य की आधारशिला
भरतपुर। समृद्ध भारत अभियान के निदेशक सीताराम गुप्ता ने भरतपुर को रोजगार, जल सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कृषि, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में मॉडल जिला बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि केवल आधारभूत सुविधाओं के निर्माण से जिले का समग्र विकास संभव नहीं है। इसके लिए दीर्घकालिक एवं समन्वित विकास नीति अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भरतपुर आज भी बेरोजगारी, जल संकट और औद्योगिक पिछड़ेपन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। स्थानीय स्तर पर आधुनिक शिक्षण संस्थान, कौशल विकास केंद्र और उद्योग स्थापित होने से युवाओं का पलायन रुकेगा तथा जिले में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
रोजगार और शिक्षा को बताया विकास की सबसे बड़ी जरूरत
सीताराम गुप्ता ने भरतपुर में पूर्व स्वीकृत भारतीय कौशल संस्थान को शीघ्र शुरू करने, आईआईएम की स्थापना, वैर में प्रस्तावित एग्रो प्रोसेसिंग सेंटर को शुरू करने तथा कुम्हेर कृषि महाविद्यालय के निकट कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को आधुनिक शिक्षा और कौशल मिलेगा तथा किसानों को नई तकनीकों का लाभ प्राप्त होगा।
उन्होंने महिला कारागार सेवर और राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र के बीच उपलब्ध भूमि पर हनी एक्सीलेंस सेंटर स्थापित करने तथा भरतपुर में गारमेंट्स एवं टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब विकसित करने का भी सुझाव दिया, जिससे विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकें।
यमुना जल और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर रखे सुझाव
गुप्ता ने कहा कि हाल ही में हुए यमुना जल समझौते का अधिकतम लाभ भरतपुर और डीग जिले को मिलना चाहिए। उन्होंने गुड़गांव कैनाल के विस्तार, पांचना बांध में भरतपुर का वैधानिक जल हिस्सा सुनिश्चित करने, गंभीर नदी से बाणगंगा के पुनर्जीवन तथा ईआरसीपी के तहत प्रमुख जलाशयों को जोड़ने की मांग की।
उन्होंने बताया कि समृद्ध भारत अभियान “भरतपुर-2050 जल संसाधन योजना” तैयार कर रहा है, जिसके माध्यम से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण और आधुनिक जल प्रबंधन के जरिए वर्ष 2050 तक भरतपुर को जल-सुरक्षित जिला बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
पर्यटन को बताया आर्थिक विकास का नया आधार
सीताराम गुप्ता ने कहा कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, लोहागढ़ किला, डीग महल और अन्य ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के कारण भरतपुर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने भरतपुर को पर्यटन जिला घोषित करने और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने सुजान गंगा नहर के वैज्ञानिक पुनरोद्धार, वॉक-वे, साइकिल ट्रैक, हरित पट्टी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के विकास का सुझाव देते हुए कहा कि इससे भरतपुर को विश्वस्तरीय हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म शहर के रूप में विकसित किया जा सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने भरतपुर-बयाना-हिण्डौन-करौली-सवाई माधोपुर, डीग-कामां-पहाड़ी, भरतपुर-अलवर-बहरोड़ तथा भरतपुर-मथुरा-अलीगढ़-बरेली मार्गों को फोरलेन बनाने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि जल, रोजगार, शिक्षा, कृषि, उद्योग और पर्यटन को एकीकृत दृष्टिकोण से विकसित किया जाए तो भरतपुर पूर्वी राजस्थान का आर्थिक केंद्र बन सकता है।
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