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    टैक्स चोरी के आरोप में MLA संजय पाठक की कंपनी पर शिकंजा, करोड़ों की रिकवरी का आदेश

    कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले की विजयराघवगढ़ विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। उनके परिवार के मालिकाना हक वाली कंपनी 'यश लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड' को स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) चोरी के एक मामले में बड़ा झटका लगा है। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय ने विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की इस पारिवारिक कंपनी और पांच अन्य भू-स्वामियों पर करोड़ों रुपये की स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क (Registration Fee) की वसूली का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यह फैसला जमीन रजिस्ट्रियों के दौरान भूमि की वास्तविक स्थिति छिपाकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के आरोप में सुनाया है।

    क्या है पूरा मामला?

    यह पूरा विवाद कटनी के ग्राम झिंझरी में स्थित लगभग 1.26 हेक्टेयर भूमि की वर्ष 2018 और 2019 में कराई गई रजिस्ट्रियों से संबंधित है।

    • शिकायत: शिकायतकर्ता नाजिम खान ने मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।

    • आरोप: आरोप था कि कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) हर्ष कपूर और संबंधित जमीन विक्रेताओं ने मिलीभगत की। उन्होंने पुराने विक्रय पत्रों (Sale Deeds) की तुलना में नई रजिस्ट्रियों में भूमि की चौहद्दी (Boundary) और उसकी वास्तविक व्यावसायिक स्थिति को बदल कर दिखाया, ताकि कम टैक्स देना पड़े।

    कोर्ट का आदेश: पेनाल्टी और ब्याज समेत 2.20 करोड़ रुपये की वसूली

    कलेक्टर ऑफ स्टाम्प न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार अलग-अलग रजिस्ट्री प्रकरणों में भूमि का कम मूल्यांकन (Under-valuation) माना है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है:

    • मूल राशि: कंपनी को कम चुकाए गए स्टाम्प शुल्क के रूप में ₹77,64,958 (करीब 77.64 लाख रुपये) की मूल राशि जमा करनी होगी।

    • ब्याज और जुर्माना: साल 2018 में हुई रजिस्ट्री की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान के दिन तक 1% प्रति माह की दर से ब्याज और 1% प्रति माह की दर से जुर्माना (पेनाल्टी) भी वसूला जाएगा।

    कुल देय राशि: प्रशासनिक सूत्रों और गणना के अनुसार, यदि कंपनी द्वारा इस पूरी राशि का भुगतान चालू माह (जुलाई 2026) में किया जाता है, तो ब्याज और जुर्माने को मिलाकर यह कुल देनदारी करीब ₹2,20,00,000 (2.20 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। इस फैसले के बाद क्षेत्र के सियासी और व्यावसायिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

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