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    प्रदेश में बनी दो हजार नयी दुग्ध सहकारी समितियां

    भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने के संकल्प के संदर्भ में संचालित गतिविधियों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि के प्रयासों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) और दुग्ध संघों का कार्यभार ग्रहण करने के बाद राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।

    बैठक में सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में बताया कि प्रदेश में लगभग 2000 नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित हुई हैं। गत 2 वर्ष में प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है।

    प्रदेश में बढ़ा है 27 प्रतिशत दुग्ध संकलन

    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में वर्ष 2024-25 में जहां 8.73 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दुग्ध संकलन हो रहा था, वहीं यह 2025-26 में बढ़कर 9.66 किलोग्राम और वर्ष 2026-27 में जुलाई माह तक 9.75 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया है। यह प्रदेश में 27 प्रतिशत बढ़ा है। इसी तरह दुग्ध उत्पादकों को वर्ष 2024-25 में 1477 करोड़ के भुगतान की राशि वर्ष 2025-26 में 1780 करोड़ हो गई जो गत वर्ष से 27 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई।

    50 प्रतिशत गांव में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य

    बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 1,926 दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इसके साथ ही 801 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। वर्ष 2028-29 तक 3827 अतिरिक्त दुग्ध सहकारी समितियों के गठन का लक्ष्य है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में आगामी पांच वर्ष में कम से कम 50 प्रतिशत गांव में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य है।

    ग्वालियर और जबलपुर दुग्ध संघों को मिला ऋण

    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने ग्वालियर दुग्ध संघ को दुग्ध संकलन और प्रसंस्करण के लिए बिना ब्याज के 470 लाख और जबलपुर दुग्ध संघ को 500 लाख का ऋण प्रदान किया है।

    प्रमुख निर्देश

        दुग्ध संकलन को बढ़ाया जाये।

        विपणन कार्य में लगे मैदानी स्टॉफ के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

        सम्पूर्ण डेयरी वैल्यू चेन का डिजीटाईजेशन किया जाए।

        दुग्ध के साथ घी, दही, छाछ आदि के विक्रय में हुई वृद्धि को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में नए पार्लर आवंटन के लिए प्रयास किए जाएं।

        दुग्ध सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम की स्थापना के प्रयास करें।

        एमपीसीडीएफ द्वारा महिला सदस्यता को प्रोत्साहन दिया जाए।

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