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    क्या पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं? चन्नी की लगातार बैठकों ने बढ़ाई बेचैनी

    चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस हाईकमान द्वारा जारी की गई नई संगठनात्मक सूची को लेकर पार्टी के भीतर कलह खुलकर सामने आने लगी है। संगठन में किए गए इस फेरबदल के बाद कई दिग्गज नेताओं और पूर्व मंत्रियों ने हालांकि खुलकर तो कुछ नहीं कहा है, लेकिन उनके तेवर साफ तौर पर नाराजगी का संकेत दे रहे हैं। इसी बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लगातार दूसरे दिन अपने करीबी विधायकों, पूर्व मंत्रियों और समर्थक नेताओं की मोरिंडा स्थित अपने निजी आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसने पंजाब कांग्रेस के भीतर मचे सियासी घमासान को और तेज कर दिया है। लगातार दो दिनों से चन्नी के घर पर हो रही इन बैठकों से साफ है कि यह असंतोष केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि पार्टी के अंदर एक बड़े गुट की सामूहिक रणनीति का हिस्सा है।

    नए सांगठनिक ढांचे से उभरा आंतरिक विरोध

    दरअसल, कांग्रेस आलाकमान ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पंजाब संगठन की नई टीम का एलान किया था। इस फेरबदल में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया है। हैरानी की बात यह है कि पार्टी के इस नए ढांचे का स्वागत केवल मुट्ठी भर नेताओं ने ही किया है, जबकि अधिकांश वरिष्ठ चेहरों ने इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली है। पार्टी का एक बड़ा धड़ा यह मानकर चल रहा है कि चुनावों से ठीक पहले संगठन में जिस बड़े बदलाव की जरूरत थी, उसे दरकिनार कर पुराने चेहरों को ही रिपीट कर दिया गया है, जिससे चुनावों में मनमाफिक नतीजे मिलना मुश्किल होगा।

    वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी और बगावती सुर

    इस नई सूची के सामने आने के बाद से ही दिग्गज नेताओं की नाराजगी अलग-अलग तरीकों से बाहर आ रही है। चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक सांकेतिक पोस्ट साझा कर अपनी असहमति और नाराजगी के संकेत दे दिए हैं। वहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी आलाकमान के इस फैसले पर कोई उत्साह नहीं दिखाया है। चन्नी के आवास पर शुक्रवार को दोबारा जुटे नेताओं के बीच इसी बात पर गहन मंथन हुआ कि नए सांगठनिक बदलावों के बीच आगे की राजनीतिक दिशा क्या होनी चाहिए। नेताओं की यह लामबंदी दर्शाती है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर गुटबाजी और गहरा सकती है।

    चुनावी तैयारियों पर संकट और आलाकमान की चुनौती

    विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पार्टी के भीतर पनपा यह असंतोष कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बड़ा झटका दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इन रूठे हुए नेताओं को नहीं मनाया गया, तो चुनाव अभियान की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस बैकफुट पर आ जाएगी। फिलहाल सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें चरणजीत सिंह चन्नी के अगले कदम और उनके गुट की बैठकों के बाद निकलने वाले नतीजों पर टिकी हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में कांग्रेस हाईकमान इन असंतुष्ट नेताओं को दिल्ली तलब कर बातचीत के जरिए मामले को शांत करने की कोशिश कर सकता है, ताकि एकजुट होकर चुनाव लड़ा जा सके।

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