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    दीप्ति शर्मा ने बताया क्यों धोनी और जोकोविच हैं एक जैसे, तुलना पर दिया दिलचस्प जवाब

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार और दिग्गज ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने खेल जगत के दो सबसे बड़े सूरमाओं—भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और दुनिया के महानतम टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच की तुलना करते हुए एक बेहद दिलचस्प और बड़ा बयान दिया है। दीप्ति शर्मा ने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी और 24 बार के ग्रैंडस्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच के बीच एक ऐसी अद्भुत और अनोखी समानता है, जो उन्हें दुनिया के अन्य खिलाड़ियों से बिल्कुल अलग खड़ा करती है। दोनों ही दिग्गजों के पास मैदान या कोर्ट पर सबसे मुश्किल और दबाव वाले हालातों में भी खुद को पूरी तरह शांत, स्थिर और केंद्रित रखने की एक असाधारण क्षमता है।

    उल्लेखनीय है कि दीप्ति शर्मा हाल ही में संपन्न हुए महिला टी20 विश्व कप में भाग लेने वाली भारतीय राष्ट्रीय टीम की मुख्य कड़ी थीं। हालांकि, इस वैश्विक टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और टीम का सफर ग्रुप चरण में ही थम गया था। विश्व कप की इस निराशा के बाद दीप्ति अपनी थकान मिटाने और अपने एक पुराने सपने को पूरा करने के लिए इस वक्त ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) की राजधानी लंदन में मौजूद हैं, जहां वे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट विंबलडन (Wimbledon) के मैचों का लाइव लुत्फ उठा रही हैं।

    मुश्किल हालातों में जोकोविच और धोनी कभी नहीं मानते हार: दीप्ति शर्मा का खास विश्लेषण

    दीप्ति शर्मा ने विंबलडन के दौरान अपनी खेल प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की। उन्होंने दुनिया के सामने दोनों ही खेलों के इन महान कप्तानों और खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती का एक सटीक विश्लेषण पेश किया:

    • जोकोविच की कभी न टूटने वाली मानसिक शक्ति: जब आप नोवाक जोकोविच की बात करते हैं, तो पूरी दुनिया उनकी अविश्वसनीय और फौलादी मानसिक ताकत (Mental Toughness) का लोहा मानती है। वह एक ऐसे जुझारू इंसान और एथलीट हैं जो कभी भी हार नहीं मानते, चाहे कोर्ट पर परिस्थितियां उनके खिलाफ कितनी भी विपरीत या मुश्किल क्यों न हो जाएं। वे हर हार के मुंह से जीत छीनना जानते हैं।

    • क्रिकेट के 'कैप्टन कूल' भी हैं बिल्कुल वैसे ही: क्रिकेट के मैदान पर हमारे एमएस धोनी सर भी काफी हद तक जोकोविच की इसी मानसिकता के समान हैं। वह पूरी दुनिया में अपनी अकल्पनीय शांति और ठंडे दिमाग से फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। मैदान पर मैच चाहे कितना भी फंसा हो, उन्हें देखकर कभी नहीं लगता कि वह किसी तनाव या मुश्किल हालात में हैं। जब भी अंतिम ओवरों का भारी दबाव आता है, तो वह उसे बहुत ही सहजता से हैंडल करते हैं।

    • युवाओं के लिए सबसे बड़ी सीख: जोकोविच और धोनी दोनों में यही सबसे खास बात है कि जब टीम या खेल को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो वे घबराने के बजाय बिल्कुल शांत और चट्टान की तरह मजबूत बने रहते हैं। एक युवा क्रिकेटर होने के नाते, उनसे हम यही सीखते हैं कि दबाव के क्षणों में कैसे खुद पर काबू रखा जाए और कैसे हारी हुई बाजी को पलटा जाए।

    जोकोविच बने दीप्ति के सबसे पसंदीदा खिलाड़ी, फेडरर और नडाल को छोड़कर चुना नया आदर्श

    टेनिस के प्रति अपनी दीवानगी को साझा करते हुए दीप्ति ने खुलासा किया कि नोवाक जोकोविच इस समय पूरी दुनिया में उनके सबसे पसंदीदा एथलीट बन चुके हैं। वे उनके खेल और उनकी तकनीक को बहुत करीब से फॉलो करती हैं:

    • लड़ने का जज्बा है प्रेरणादायी: जोकोविच जिस तरह से टेनिस कोर्ट पर हर एक पॉइंट के लिए अंतिम सांस तक लड़ते हैं, उनकी वह मानसिक दृढ़ता और कभी न हार मानने वाला रवैया मुझे व्यक्तिगत रूप से बेहद प्रभावित करता है। उन्हें लाइव खेलते देखना हमेशा एक खिलाड़ी के तौर पर नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।

    • फेडरर-नडाल के दौर से जोकोविच तक का सफर: दीप्ति ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि मैं रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे महान टेनिस दिग्गजों के ऐतिहासिक मैचों को देखते हुए बड़ी हुई हूं। मैंने एक लंबे समय तक उन दोनों के बीच की प्रतिद्वंद्विता को टीवी पर करीब से फॉलो किया है। लेकिन हाल के वर्षों में, जिस तरह से जोकोविच ने टेनिस की दुनिया पर राज किया है, वह लाजवाब है। अब वे मेरे नंबर वन पसंदीदा खिलाड़ी बन गए हैं और मैं किसी भी अन्य खिलाड़ी की तुलना में सिर्फ उनके ही मैच देखना पसंद करती हूं।

    विंबलडन का सपना हुआ पूरा: मेरा बचपन से यह एक बड़ा सपना था कि मैं एक दिन लंदन के ऐतिहासिक विंबलडन कोर्ट पर आकर घास के मैदान पर टेनिस का मैच लाइव देखूं। आखिरकार आज यहां आकर मुझे बहुत ही अद्भुत और अविस्मरणीय महसूस हो रहा है। जब आपने बचपन से किसी प्रतिष्ठित चीज को सिर्फ टीवी स्क्रीन पर देखा हो, उसे पहली बार अपनी आंखों के सामने लाइव देखने का आनंद और अहसास ही बिल्कुल अलग होता है। यहां का विंटेज माहौल, दर्शकों की भारी भीड़ और कोर्ट की ऊर्जा सचमुच कमाल की है। मैं विंबलडन के इस सफर के हर एक पल को भरपूर जी रही हूं।

    सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर के साथ टेनिस देखने की है दिली ख्वाहिश

    जब इंटरव्यू के दौरान दीप्ति शर्मा से एक बेहद दिलचस्प और काल्पनिक सवाल पूछा गया कि "यदि आपको विंबलडन में एक पूरा दिन बिताने के लिए भारत के किन्हीं तीन दिग्गज क्रिकेटरों को अपने साथ ले जाने का मौका मिले, तो आप किसे चुनेंगी?"

    इस सवाल का जवाब दीप्ति ने बेहद उत्साह के साथ दिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए भारतीय क्रिकेट के तीन सबसे बड़े कप्तानों और विचारकों के नामों का चयन किया। दीप्ति ने कहा कि मैं विंबलडन के शाही बॉक्स में अपने साथ क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री और महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर को ले जाना चाहूंगी।

    दीप्ति ने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि इन तीनों ही महान खिलाड़ियों को न केवल क्रिकेट बल्कि दुनिया के हर खेल (विशेषकर टेनिस) के बारे में बहुत ही गहरी और बारीक तकनीकी जानकारी है। मैच के दौरान जब खेल अपनी चरम सीमा पर होगा, तो कोर्ट के बगल में बैठकर टेनिस शॉट पर उनके व्यक्तिगत विचार, गेम की रणनीतियों का विश्लेषण और उनकी मजेदार कमेंट्री सुनना अपने आप में एक बेहद शानदार, ऐतिहासिक और कभी न भूलने वाला अनुभव होगा। वे खेल के दिग्गजों की नजर से टेनिस को और बेहतर ढंग से समझना चाहती हैं।

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