More
    Homeबिजनेसहोर्मुज संकट के बाद ओपेक+ का एक्शन, अगस्त से बढ़ेगी कच्चे तेल...

    होर्मुज संकट के बाद ओपेक+ का एक्शन, अगस्त से बढ़ेगी कच्चे तेल की सप्लाई

    नई दिल्ली: ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने वैश्विक बाजार को देखते हुए कच्चे तेल के उत्पादन को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। संगठन ने आगामी अगस्त 2026 से तेल उत्पादन में प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल का निर्यात फिर से पटरी पर लौट रहा है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध से पहले वाले स्तर पर आ गई हैं।

    युद्ध के बाद उत्पादन में उतार-चढ़ाव

    पश्चिम एशिया में उपजे संघर्ष के कारण तेल उत्पादन पर काफी बुरा असर पड़ा था। ओपेक प्लस समूह का कुल उत्पादन जो फरवरी में 4.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन था, वह मई तक गिरकर 3.31 करोड़ बैरल प्रतिदिन पर आ गया था। हालांकि, जून से निर्यात में कुछ सुधार जरूर देखा गया, लेकिन उत्पादन अब भी संकट से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अप्रैल के आखिर में इस समूह से अलग होने के फैसले ने भी संगठन के समीकरण बदले हैं।

    कोटा बढ़ोतरी और चरणबद्ध वापसी

    ओपेक और उसके सहयोगी देशों के 7 बड़े उत्पादकों ने अप्रैल से जुलाई के बीच अपने तय कोटे में लगभग 8 लाख बैरल प्रतिदिन की वृद्धि की थी। लेकिन तनाव के चलते सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण बाजार पर इसका सकारात्मक असर तुरंत नहीं दिख सका। अब सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान जैसे देश साल 2023 में तय की गई 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्वैच्छिक कटौती को धीरे-धीरे खत्म कर रहे हैं।

    कीमतें सामान्य होने की मुख्य वजहें

    तमाम भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति में दिक्कतों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर आ चुकी हैं। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

    • चीन की ओर से आयात की मांग का कमजोर होना।

    • मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के बाहर के देशों से तेल की सप्लाई बढ़ना।

    • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा अपने रणनीतिक तेल भंडार से रिकॉर्ड मात्रा में तेल जारी किया जाना।

    बाजार में ओवरसप्लाई का खतरा

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ जहां सप्लाई तेजी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मांग उस रफ्तार से नहीं है। ऐसे में बाजार में 'ओवरसप्लाई' (जरूरत से ज्यादा तेल) की स्थिति बन सकती है, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, यूएई जैसे बड़े खिलाड़ी के ओपेक छोड़ने से अब इस संगठन की एकजुटता और भविष्य की रणनीतियों पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here