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    मोबाइल हिस्ट्री ने खोले राज, हत्या से पहले सिया कर रही थी केस की पड़ताल

    पुणे। महाराष्ट्र के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने से पहले मुख्य आरोपी सिया गोयल ने बाकायदा इंटरनेट पर क्राइम केसों की स्टडी की थी। उसने सर्च इंजन पर इंदौर के मशहूर राजा रघुवंशी मर्डर केस के बारे में पूरी जानकारी जुटाई थी। इतना ही नहीं, सिया ने गूगल पर यह भी सर्च किया था कि क्या पुलिस कस्टडी के दौरान महिला अपराधियों के साथ मारपीट की जाती है। इस सनसनीखेज बात का खुलासा पुलिस द्वारा जब्त किए गए सिया के दोनों मोबाइल फोन की सर्च हिस्ट्री से हुआ है।

    मामले की कड़ियों को जोड़ रही पुलिस दो दिन पहले सिया को साक्ष्य जुटाने के लिए उसके निवास स्थान पर लेकर गई थी, जहां तलाशी के दौरान उसके बेडरूम से दूसरा गुप्त मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। इसके साथ ही वारदात वाले दिन के कुछ चश्मदीद गवाह भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनके बयान इस मामले में आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसने के लिए बेहद अहम कड़ी साबित हो रहे हैं।

    उंगली की चोट या आपत्तिजनक इशारा? पिता ने दी सफाई

    हिरासत के दौरान सिया गोयल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह मीडिया कैमरों की तरफ आपत्तिजनक (अश्लील) इशारा करती हुई नजर आ रही थी। इस पर मचे बवाल के बाद अब सिया के पिता अपनी बेटी के बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनके मुताबिक, जब पुलिस कानूनी प्रक्रियाओं के लिए सिया को घर ला रही थी, तब गाड़ी का दरवाजा अचानक बंद होने की वजह से सिया की दो उंगलियों में गंभीर चोट आ गई थी। वह कैमरों के सामने वही चोट दिखा रही थी, न कि कोई अश्लील इशारा कर रही थी। उन्होंने कहा कि उस वक्त मौके पर तैनात पुलिसकर्मी भी इस बात की गवाही दे सकते हैं।

    हत्या के बाद पीड़ित परिवार को बंधाया ढांढस

    इस पूरे हत्याकांड में आरोपियों की क्रूरता और शातिराना अंदाज यहीं खत्म नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को केतन को खाई में धकेलने के ठीक अगले ही दिन यानी 19 जून को सिया बेहद सामान्य बनकर केतन के घर पहुंच गई। वहां उसने केतन के पिता को सांत्वना देते हुए कहा कि 'हिम्मत रखिए, केतन हमें ऊपर से देख रहा है।' जांच अधिकारियों ने बताया कि हत्या करने के बाद 18 से लेकर 23 जून (गिरफ्तारी के दिन) तक दोनों आरोपी बिल्कुल सामान्य जिंदगी जीते रहे और पकड़े जाने के बाद भी उनके चेहरे पर शिकन या पछतावे का कोई भाव नहीं था। जांच में यह भी पता चला है कि हत्या का सह-आरोपी और सिया का बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी बेहद चालाकी से एक ही मोबाइल में दो सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था और दोनों आपस में कोड वर्ड में बात करते थे।

    सगाई के बाद रची मौत की साजिश: 19 दिनों का खौफनाक घटनाक्रम

    • 31 मई (साजिश की शुरुआत): नवंबर 2025 में सगाई होने के बाद केतन अक्सर सिया को अपने घर लाता था और घुमाने ले जाता था। केतन को पहाड़ों पर ट्रैकिंग का बेहद शौक था और उसने सिया को लोहगढ़ किले पर चलने को कहा। इसी दौरान सिया के दिमाग में केतन को रास्ते से हटाने का पहला ख्याल आया।

    • 5 जून (पासपोर्ट छुपाया): सिया ने जून की शुरुआत में ही केतन पर किले पर जाने का दबाव बनाया, लेकिन वह नहीं माना। असल में 6 जून को केतन, उसकी बहन, एक दोस्त और सिया के साथ इंडोनेशिया के बाली जाने का ट्रिप प्लान था। पुलिस के अनुसार, सिया इस विदेश यात्रा पर नहीं जाना चाहती थी, इसलिए उसने चालाकी से केतन का पासपोर्ट ही गायब कर दिया।

    • 14 जून (हत्या का पहला नाकाम प्रयास): सिया के बार-बार कहने पर दोनों 14 जून को लोहगढ़ किले पहुंचे। वहां एक पॉइंट पर सिया ने केतन को गहरी खाई में धक्का दे दिया, लेकिन खुशकिस्मती से केतन एक पेड़ की डाल से अटक कर बच गया। जब केतन ने हैरान होकर धक्का देने का कारण पूछा, तो सिया ने बात घुमाते हुए कहा कि वहां एक सांप था, जिससे उसकी जान बचाने के लिए उसने ऐसा किया। मासूम केतन ने घर आकर सबको बताया भी कि सिया ने उसकी जान बचाई है।

    • 18 जून (खाई में देकर धकेला, मौत): 19 जून को सिया का जन्मदिन था, जिसके लिए केतन ने महाबलेश्वर के एक आलीशान रिजॉर्ट में बुकिंग कर रखी थी। लेकिन उससे पहले ही सिया ने प्री-वेडिंग फोटोशूट का बहाना बनाकर केतन को दोबारा लोहगढ़ फोर्ट चलने के लिए राजी कर लिया। इस बार साजिश के तहत चेतन चौधरी भी चुपके से उनके पीछे-पीछे आ गया। जैसे ही केतन पहाड़ियों के खूबसूरत नजारों को देखने में व्यस्त हुआ, दोनों ने मिलकर उसे 400 फीट गहरी खाई में नीचे धकेल दिया।

    फिलहाल, इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले दोनों ही आरोपी 16 जुलाई तक के लिए येरवदा जेल की न्यायिक हिरासत में सलाखों के पीछे भेज दिए गए हैं।

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