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    रेप-मर्डर केस को लेकर गरमाई बंगाल की राजनीति, ममता सरकार पर उठे सवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में हुए कथित बलात्कार और हत्याकांड को लेकर राज्य का सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में तफ्तीश आगे बढ़ने के साथ ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी खेमे के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच, सोमवार को सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं कोलकाता की सड़कों पर उतरे एक कैंडल मार्च का हिस्सा बनीं और उन्होंने मृतका को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

    कैंडल मार्च में मुख्यमंत्री और पीड़ित परिवार से मुलाकात

    सोमवार की सुबह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने निवास स्थान पर टीएमसी के उस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जो बरुईपुर का दौरा करके लौटा था। इस डेलिगेशन में वरिष्ठ नेता डोला सेन, प्रतिमा मंडल और बिमान बनर्जी शामिल थे। इन नेताओं ने पीड़ित कुनबे से मिलकर पूरे वाकये की जमीनी हकीकत जानी और तृणमूल कांग्रेस की तरफ से उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर मुमकिन मदद का भरोसा दिया। पार्टी का साफ कहना है कि वह दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ी है और अपराधियों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री का दावा और हाउस अरेस्ट के आरोप

    इससे पहले रविवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि वे खुद पीड़ित परिवार ढांढस बंधाने बरुईपुर जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें एक तरह से "हाउस अरेस्ट" (नजरबंदी) जैसी स्थिति में रखा गया। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने भी मुख्यमंत्री के इस बयान का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी सुप्रीमो की आवाजाही पर जानबूझकर पाबंदी लगाई गई, जिसके चलते बाद में पार्टी के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को वहां भेजना पड़ा।

    पुलिसिया कार्रवाई और धारा 163 लागू

    इस खौफनाक वारदात के बाद हरकत में आई स्थानीय पुलिस ने अपनी छानबीन तेज करते हुए अलग-अलग धाराओं में तीन एफआईआर दर्ज की हैं। इनमें हत्या, उग्र भीड़ द्वारा की गई हिंसा (मॉब लिंचिंग) और सरकारी काम में बाधा डालते हुए पुलिस टीम पर हमला करने के मामले शामिल हैं। तफ्तीश के दौरान पुलिस ने शांतनु मंडल नामक स्थानीय निवासी को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक दो मुख्य आरोपियों को दबोचा जा चुका है, जबकि तीन अन्य संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ जारी है। इलाके में अमन-चैन कायम रखने के लिए प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी है।

    सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त और विपक्षी दलों की सक्रियता

    तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के इर्द-गिर्द राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी नफ़री तैनात कर दी गई है। मुख्यमंत्री को रोके जाने के विरोध में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन भी किया। दूसरी तरफ, सूबे के मुख्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर पूरी तरह हमलावर हैं। सीपीआईएम (CPM) के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती की अगुवाई में एक वामपंथी प्रतिनिधिमंडल ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पूरी घटना की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने की मांग बुलंद की है।

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