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    महिला की रेकी, मास्टर-की का खेल; ई-रिक्शा चोरी करने वाले छह आरोपी गिरफ्तार

    आजमगढ़। जिले में लगातार बढ़ रही ई-रिक्शा और महंगी बैटरियों की चोरी की वारदातों पर लगाम कसते हुए पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। कोतवाली पुलिस, स्वात टीम (विशेष अपराध नियंत्रण टीम), चोरी अनावरण दल और सर्विलांस सेल की संयुक्त घेराबंदी में एक शातिर अंतरजनपदीय गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। पुलिस ने इस मामले में महिला मास्टरमाइंड सहित कुल छह शातिरों को दबोचा है। इनके पास से चोरी की 8 ई-रिक्शा, 36 बैटरियां और चोरी में इस्तेमाल होने वाली एक मास्टर-की (मुख्य चाबी) बरामद की गई है, जिसकी कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई है।

    वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बुना गया जाल

    पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने पूरे मामले का विवरण देते हुए बताया कि शहर कोतवाली और सिधारी थाना क्षेत्र में पिछले कुछ समय से ई-रिक्शा चोरी के मामलों में अचानक उछाल आया था। इसे गंभीरता से लेते हुए एसपी के निर्देश पर एक स्पेशल ज्वॉइंट टीम का गठन किया गया था। जांच टीम ने जब डिजिटल साक्ष्यों और सर्विलांस सेल की मदद ली, तो मंगलवार तड़के लगभग एक बजे मोहटी घाट इलाके से छह संदिग्धों को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में इनकी पहचान मो. मिजान, अखिलेश यादव उर्फ समीर यादव, विनोद जायसवाल, योगेश्वर जायसवाल, बृजेश कुमार गुप्ता और तबस्सुम के रूप में हुई।

    भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिला आरोपी करती थी रेकी

    पुलिस की कड़ी पूछताछ में यह बात सामने आई कि इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद योजनाबद्ध था। गिरोह की महिला सदस्य तबस्सुम मुख्य रूप से रेकी का काम संभालती थी। वह दिन के समय शहर के व्यस्त बाजारों और सुनसान पार्किंग स्थलों पर घूमकर ऐसे ई-रिक्शा की पहचान करती थी, जो बिना किसी निगरानी या सुरक्षा के खड़े होते थे। लोकेशन फाइनल होते ही वह अपने साथियों को सूचना दे देती थी।

    मास्टर-की से उड़ाते थे वाहन, कबाड़ में खपाते थे सामान

    सूचना मिलते ही गिरोह के अन्य पुरुष सदस्य मौके पर पहुंचते और मास्टर-की का इस्तेमाल कर पलक झपकते ही ई-रिक्शा लेकर रफूचक्कर हो जाते थे। चोरी की गाड़ी को सीधे किसी एकांत या सुनसान जगह पर ले जाया जाता था, जहां सबसे पहले उसकी महंगी बैटरियां और अन्य कीमती कलपुर्जे निकाल लिए जाते थे। इसके बाद ई-रिक्शा की बॉडी को कबाड़ के जरिए या फर्जी दस्तावेजों के सहारे दूसरों को बेच दिया जाता था। इस अवैध धंधे से जो भी मोटी रकम मिलती थी, उसे गिरोह के सभी सदस्य आपस में बराबर-बराबर बांट लेते थे।

    पकड़े गए बदमाशों का पुराना आपराधिक इतिहास, पुलिस टीम को नकद इनाम

    पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों ने शहर कोतवाली और सिधारी थाना क्षेत्र में दर्जनों वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की है। गिरफ्तार अपराधियों में शामिल अखिलेश यादव उर्फ समीर यादव एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी, आर्म्स एक्ट और पॉक्सो (POCSO) जैसे कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इस बड़ी सफलता और सटीक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी को विशेष प्रशस्ति-पत्र देने का एलान किया है। इसके साथ ही, गिरोह को दबोचने वाली संयुक्त पुलिस टीम को उनके इस सराहनीय कार्य के लिए 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई है।

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