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    चढ़ावा चोरी केस में बड़ी कार्रवाई, निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ FIR

    मुंबई: महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली इलाके से सोशल मीडिया पर एक बेहद चौंकाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भारी आक्रोश है। वायरल फुटेज में शिवसेना के स्थानीय कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे और उनके समर्थक मुंबई के पास स्थित एक अस्पताल में एक महिला डॉक्टर, नर्सों और अन्य मेडिकल स्टाफ के साथ सरेआम बेरहमी से मारपीट और बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं। यह शर्मनाक घटना 6 जुलाई की बताई जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद जनमानस में फैले गुस्से के बावजूद आरोपी कॉर्पोरेटर अपने किए पर अड़े हुए हैं और उन्होंने इस घटना पर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।

    "फोन पर मारा था, डॉक्टर पर नहीं" – आरोपी कॉर्पोरेटर की अजीब सफाई

    चारों तरफ से घिरने के बाद शिवसेना नेता रमेश म्हात्रे ने इस मामले पर अपनी अजीबोगरीब सफाई पेश की है। उन्होंने दावा किया, "मैंने अस्पताल में महिला डॉक्टर पर कोई हमला नहीं किया।" जब मीडिया और पुलिस द्वारा उन्हें सीसीटीवी (CCTV) फुटेज दिखाया गया, तो उन्होंने अपने कृत्य को सही ठहराते हुए कहा कि वे सिर्फ डॉक्टर का फोन छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि वह उनकी शिकायत नहीं सुन रही थीं। म्हात्रे ने कहा:

    "मैंने बस उनके हाथ में पकड़े फोन पर थप्पड़ मारा था ताकि उनका ध्यान फोन से हटा सकूं। शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे ने हमें अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाया है।"

    म्हात्रे पूरे मामले में खुद को सही ठहराते हुए सारा दोष अस्पताल के डॉक्टरों पर मढ़ते रहे। उन्होंने यह अजीब दावा भी किया कि उनके इस उग्र कदम की वजह से ही एक गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे की जान बच सकी, इसलिए वे किसी भी कीमत पर माफी नहीं मांगेंगे।

    NICU बेड की कमी को लेकर शुरू हुआ था पूरा विवाद

    अस्पताल प्रशासन और अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी हिंसा की मुख्य वजह नवजात शिशुओं के लिए बने आईसीयू यानी एनआईसीयू (NICU) बेड न मिलना था। दरअसल, डॉक्टरों ने एक गर्भवती महिला के परिजनों को समय रहते सूचित कर दिया था कि डिलीवरी के बाद होने वाले बच्चे को तत्काल एनआईसीयू केयर की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन वर्तमान में अस्पताल के सभी बेड पूरी तरह भरे हुए हैं। डॉक्टरों ने परिवार की भलाई के लिए उन्हें किसी दूसरे सुसज्जित अस्पताल में जाने की सलाह दी थी।

    इसी बात पर कॉर्पोरेटर और उनके समर्थक भड़क गए और विवाद मारपीट में बदल गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक महिला डॉक्टर खुद को बचाने के लिए डेस्क के पीछे हटती है और पुलिस या उच्चाधिकारियों को सूचित करने के लिए मोबाइल निकालने का प्रयास करती है, तभी पीछे से आए कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे उनके हाथ पर इतनी जोर से वार करते हैं कि फोन दूर जा गिरता है। इसके बाद उनके गुर्गे बाकी नर्सिंग स्टाफ पर टूट पड़ते हैं।

    सांसद श्रीकांत शिंदे की कड़ी निंदा, पार्टी से निष्कासन और सख्त कानूनी कार्रवाई का वादा

    इस गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए कल्याण के शिवसेना सांसद और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हुए इस हमले की तीखे शब्दों में निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात रखते हुए लिखा:

    "अस्पताल के भीतर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर हुआ यह हमला बेहद निंदनीय और अक्षम्य है। खुद एक डॉक्टर होने के नाते मैं भली-भांति जानता हूं कि चिकित्सा क्षेत्र सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की निस्वार्थ सेवा है। बेहद तनावपूर्ण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी हमारे हेल्थ वर्कर दिन-रात जनता की सेवा में मुस्तैद रहते हैं।"

    सांसद शिंदे ने डॉक्टरों को भरोसा दिलाते हुए स्पष्ट किया कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी रसूखदार व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। स्थानीय पुलिस स्टेशन में इस संबंध में गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस हिंसक घटना पर पार्टी का रुख पूरी तरह सख्त है; हमलावरों को कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा और दोषी पाए जाने पर रमेश म्हात्रे के खिलाफ पार्टी के भीतर भी कड़ी अनुशासनात्मक और निष्कासन की कार्रवाई की जाएगी।

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