More
    Homeदेशपिथौरागढ़ में मौसम की मार, सड़कें बंद और स्कूल छुट्टी से अनजान...

    पिथौरागढ़ में मौसम की मार, सड़कें बंद और स्कूल छुट्टी से अनजान रहे छात्र

    पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आसमानी आफत का दौर जारी है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भारी वर्षा और भूस्खलन के चलते जिले भर में दर्जनों ग्रामीण और सामरिक महत्व की सड़कें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। इसी बीच, मौसम के बिगड़े मिजाज को देखते हुए प्रशासन द्वारा स्कूलों में छुट्टी घोषित करने के समय को लेकर भी स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।

    पीएमजीएसवाई और लोनिवि की 15 सड़कें बंद, 1500 की आबादी प्रभावित

    जिले में हो रही भारी बारिश के कारण बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत आने वाली कुल 15 प्रमुख सड़कें भारी मलबा और बोल्डर आने के कारण बंद हैं। इनमें 12 ग्रामीण इलाकों की और दो अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़कें शामिल हैं।

    धारचूला क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से कालिका-खुमती मार्ग बंद पड़ा है। खुमती की ग्राम प्रधान विमला देवी ने बताया कि तल्ला खुमती के अन्यार बाटा में सड़क का एक बड़ा हिस्सा नीचे से कटकर नदी में समा गया है, जबकि मल्ला खुमती के चौपाता में भारी भूस्खलन हुआ है। इस मार्ग के बंद होने से हुनरी, भिड़ी, सेकली और कटौजिया सहित कई तोकों की लगभग 1500 की आबादी पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई है। इसके अलावा, अस्कोट की तवाघाट-थानीधार सड़क भी पिछले नौ दिनों से बंद चल रही है, जिससे सीमांत निवासियों की आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच ठप हो गई है।

    सामरिक सड़कों पर गिरे बोल्डर, युद्धस्तर पर खोलने का काम जारी

    चीन सीमा को जोड़ने वाली बेहद महत्वपूर्ण धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-गुंजी सड़कें भी मंगलवार को विभिन्न स्थानों पर मलबा और भारी बोल्डर गिरने से अवरुद्ध हो गईं। तवाघाट-गुंजी मार्ग गस्कू के पास करीब डेढ़ घंटे तक पूरी तरह बाधित रहा, जिसे बाद में मशीनों की मदद से यातायात के लिए सुचारू किया जा सका।

    मार्गों को खोलने की स्थिति पर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के अधिशासी अभियंता (EE) विभोर गुप्ता ने बताया कि संबंधित ठेकेदारों को संवेदनशील स्थानों से मलबा निस्तारण का काम जल्द से जल्द पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। वहीं, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने कहा कि बंद सड़कों को खोलने के लिए सभी कार्यदायी संस्थाओं की जेसीबी और पोकलैंड मशीनें मौके पर तैनात हैं। हालांकि, लगातार हो रही बारिश के कारण बंद पड़े मार्गों को साफ करने में बार-बार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जल्द ही सभी मुख्य मार्गों को बहाल कर दिया जाएगा।

    स्कूल पहुंचने के बाद आया छुट्टी का आदेश, अभिभावकों में आक्रोश

    इस आपदा के बीच बेरीनाग और गंगोलीहाट विकासखंडों में प्रशासनिक समन्वय की बड़ी कमी सामने आई है। बुधवार को लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन ने कक्षा 12 तक के सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में एहतियातन अवकाश घोषित कर दिया। लेकिन यह आदेश तब जारी हुआ और स्कूलों तक पहुंचा, जब अधिकांश बच्चे और शिक्षक भारी बारिश के बीच अपने-अपने स्कूलों में पहुंच चुके थे। इसके बाद उन्हें वापस अपने घरों की ओर लौटना पड़ा।

    ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष दीपक उप्रेती और स्थानीय अभिभावक चारू पंत ने इस लचर व्यवस्था पर कड़ा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी भूगोल के कारण ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के मासूम बच्चों को 10 किलोमीटर से भी अधिक की दूरी तय करके पैदल या जैसे-तैसे स्कूल पहुंचना पड़ता है। ऐसे में स्कूल पहुंचने के बाद छुट्टी की घोषणा करना सरासर लापरवाही है। अभिभावकों ने बताया कि पिछले महीने भी ठीक इसी तरह बच्चे स्कूल पहुंच गए थे और तब अवकाश घोषित किया गया था। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि मौसम के अलर्ट को देखते हुए अवकाश की सूचना समय रहते रात में या सुबह तड़के दी जाए, ताकि बच्चों को इस कड़कड़ाती बारिश और भूस्खलन के खतरे के बीच बेवजह सफर न करना पड़े।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here