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    रक्षा मंत्रालय के साथ आज संसदीय समिति की अहम बैठक, आत्मनिर्भर सेना पर होगा मंथन

    नई दिल्ली। देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आज दोपहर 3 बजे संसद भवन के संलग्न परिसर (पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी) में आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में भारतीय रक्षा क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) के आधुनिकीकरण, उनके संगठनात्मक ढांचे में जरूरी बदलावों और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श किए जाने की प्रबल संभावना है।

    भाजपा सांसद राधा मोहन सिंह करेंगे अध्यक्षता, आधुनिकीकरण पर पेश होगा खाका

    संसद की इस बेहद महत्वपूर्ण रक्षा समिति की कमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ सांसद राधा मोहन सिंह के हाथों में है, जो आज होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक की कार्यसूची के अनुसार, इस सत्र में रक्षा मंत्रालय और विभिन्न रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) के शीर्ष अधिकारी और प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। अधिकारियों द्वारा समिति के समक्ष 'पुराने डीपीएसयू के आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता' विषय पर एक विस्तृत और संक्षिप्त प्रस्तुति (ब्रीफिंग) दी जाएगी। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के सरकारी रक्षा कारखाने भारतीय सेनाओं की आधुनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कितने सक्षम हैं और उन्हें पूरी तरह 'आत्मनिर्भर' कैसे बनाया जाए।

    सैन्य आधुनिकीकरण और थल सेना की भूमिका पर पहले भी हो चुका है मंथन

    इससे पहले, इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए बीते 24 जून को रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की एक और अहम बैठक हुई थी। उस बैठक में 'देश की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारतीय सेना की रणनीतिक भूमिका' विषय पर वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व और रक्षा विशेषज्ञों के विचारों व सुझावों को सुना गया था। उस उच्च स्तरीय बैठक में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि और नामित सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ सहित कई अन्य शीर्ष सैन्य कमांडर मौजूद रहे थे। समिति ने उस दौरान रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किए गए मौखिक साक्ष्यों और रणनीतिक इनपुट्स का बारीकी से मूल्यांकन किया था।

    वित्तीय नवाचार पर भी सक्रिय हैं समितियां: डिजिटल रुपये की प्रगति की हो चुकी है समीक्षा

    संसदीय समितियों की इस बढ़ती सक्रियता के बीच, रक्षा क्षेत्र से इतर वित्तीय मोर्चे पर भी देश को मजबूत करने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं। इसी कड़ी में बीते 2 जुलाई को वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भी एक व्यापक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शीर्ष अधिकारियों और भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के नीतिगत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। बैठक का मुख्य एजेंडा भारत की अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC), जिसे आम बोलचाल में 'डिजिटल रुपया' कहा जाता है, की अब तक की प्रगति और देश के वित्तीय ढांचे पर इसके प्रभाव का विस्तृत आकलन करना था।

    क्यों महत्वपूर्ण हैं संसदीय समितियों की ये हालिया बैठकें?

    संसद की इन स्थायी समितियों की बैठकें ऐसे नाजुक समय में हो रही हैं जब भारत एक तरफ रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को शून्य कर 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी हथियारों का निर्यात बढ़ाने का प्रयास कर रहा है, तो दूसरी तरफ आर्थिक क्षेत्र में वित्तीय नवाचार (Financial Innovation) और मौद्रिक स्थिरता के बीच एक मजबूत संतुलन बनाने की जद्दोजहद जारी है। जहाँ एक ओर रिजर्व बैंक (RBI) अपनी संप्रभु डिजिटल मुद्रा (डिजिटल रुपया) के पायलट प्रोजेक्ट्स का दायरा लगातार बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर निजी तौर पर जारी होने वाली क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियां देश की सुरक्षा, कराधान (टैक्सेशन) और नियामक प्रवर्तन एजेंसियों के सामने लगातार नई चुनौतियां पेश कर रही हैं। ऐसे में संसद की ये समितियां इन चुनौतियों से निपटने और देश की सुरक्षा व अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए नीतिगत ब्लूप्रिंट तैयार करने में जुटी हुई हैं।

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