योगिनी एकादशी पर चावल का त्याग करें, 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे से शुरू होगा व्रत
लक्ष्मणगढ़। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 10 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना, उपवास, जप और दान करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
योग शिक्षक पंडित लोकेश कुमार ने बताया कि द्रिक पंचांग के अनुसार योगिनी एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8:16 बजे प्रारंभ होगी और 11 जुलाई को सुबह 5:22 बजे समाप्त होगी। चूंकि 11 जुलाई को सूर्योदय सुबह 5:31 बजे होगा, इसलिए उदया तिथि के अनुसार 10 जुलाई को ही व्रत रखा जाएगा। श्रद्धालु तिथि प्रारंभ होने के बाद पूजा-पाठ एवं व्रत का संकल्प ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति को हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है। पुराणों में भी इस व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत करने से जीवन के पापों का क्षय होता है, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को उत्तम लोकों की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। यह एकादशी निर्जला एकादशी के बाद तथा देवशयनी एकादशी से पहले आने वाली महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है।
पारण के समय रखें इन बातों का ध्यान
- 11 जुलाई को सूर्योदय से पहले व्रत का पारण नहीं करें।
- सूर्योदय के बाद ही द्वादशी तिथि में पारण करना शुभ माना गया है।
- पारण के समय भगवान विष्णु की पूजा के बाद तुलसी दल ग्रहण करना उत्तम माना गया है।
- पारण में अत्यधिक भोजन करने से बचें, फलाहार या हल्का सात्विक आहार लें।
- एकादशी तथा द्वादशी दोनों दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। श्रद्धालु चाहें तो चावल का दान कर सकते हैं, लेकिन स्वयं उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
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