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    बिहार में विकास का रोडमैप तैयार, कैबिनेट ने 22 प्रस्तावों को दी मंजूरी

    पटना। बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित हुई राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक में यह दूरगामी फैसला लिया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के विकास और लोक कल्याण से जुड़े कुल 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गहन चर्चा के बाद कैबिनेट की मुहर लगा दी गई, जिसने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को एक नई दिशा दी है।

    पांच वर्षों में तैयार होगा सौर ऊर्जा का बुनियादी ढांचा, पैदा होगी 500 मेगावाट बिजली

    कैबिनेट के फैसलों में सबसे प्रमुख और क्रांतिकारी निर्णय राज्य के तमाम सरकारी कार्यालयों और भवनों को सौर ऊर्जा से पूरी तरह लैस करने का है। सरकार ने आगामी पांच वर्षों के भीतर सभी चिन्हित सरकारी इमारतों की छतों पर कुल 500 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इस विशाल बुनियादी ढांचे के तैयार होने से न सिर्फ सरकारी विभागों की ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम होगी, बल्कि राज्य में बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा का उत्पादन भी संभव हो सकेगा।

    चरणबद्ध तरीके से लागू होगी योजना, पांच साल का पूरा रोडमैप हुआ तैयार

    इस विशालकाय सौर ऊर्जा परियोजना को सुचारू रूप से धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने एक सुनियोजित रोडमैप भी तैयार किया है। इसके तहत पूरे अभियान को वित्तीय वर्ष 2025-26 से लेकर वित्तीय वर्ष 2029-30 तक अलग-अलग चरणों में विभाजित करके लागू किया जाएगा। पहले चरण में जिला मुख्यालयों और बड़े प्रशासनिक भवनों को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद क्रमिक रूप से प्रखंड और पंचायत स्तर के सरकारी भवनों तक इस योजना का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा ताकि समय सीमा के भीतर लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

    बिजली बिल के भारी-भरकम खर्च में आएगी भारी कटौती, पर्यावरण को मिलेगा नया जीवन

    इस योजना के क्रियान्वयन से राज्य सरकार को दोहरे फायदे मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। एक तरफ जहां हर साल सरकारी खजाने से बिजली बिलों के भुगतान पर होने वाले करोड़ों रुपये के भारी-भरकम खर्च में भारी कटौती होगी, वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक कोयला आधारित बिजली की खपत घटने से कार्बन उत्सर्जन में भी बड़ी कमी आएगी। इस अनूठी और पर्यावरण-अनुकूल पहल को बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में एक नए और बड़े युगांतकारी बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए मददगार साबित होगी।

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