More
    Homeराज्यमहाराष्ट्रसदन में भड़के CM देवेंद्र फडणवीस, बोले- 'जिनको कुत्ता नहीं पूछता...', जानें...

    सदन में भड़के CM देवेंद्र फडणवीस, बोले- ‘जिनको कुत्ता नहीं पूछता…’, जानें किस पर साधा निशाना

    मुंबई। महानगर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के विकास को लेकर विधानसभा में नियम 293 के तहत आयोजित बहस के दौरान एक बड़ा सियासी टकराव देखने को मिला। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए सदन में तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने विपक्षी नेताओं की बयानबाजी पर पलटवार किया और सोशल मीडिया पर प्रोजेक्ट को लेकर चलाए जा रहे विमर्श की आलोचना की। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि जनहित के इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    पेड ट्रोलर्स और सोशल मीडिया की आलोचना पर बरसे मुख्यमंत्री

    सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और प्रोजेक्ट के खिलाफ लिखे जा रहे संदेशों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने वरिष्ठ नेता जयंत राव पाटिल के एक बयान का हवाला देते हुए अबू आजमी से कहा कि कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर आकर सबको गालियां देने का काम करते हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग बकायदा पैसा लेकर इस महत्वपूर्ण 'मिसिंग लिंक' प्रोजेक्ट के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई महाराष्ट्र की छवि को नुकसान पहुंचाएगा या उसका अपमान करेगा, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

    भारी बारिश और भूस्खलन के बाद मिसिंग लिंक पर खड़ा हुआ विवाद

    लगभग 7,000 करोड़ रुपए की भारी लागत से तैयार हुए मुंबई-पुणे 'मिसिंग लिंक' एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट पर हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के चलते भूस्खलन की घटना सामने आई थी। इस मलबे के कारण करीब 18 घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा, जिसने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया। विपक्ष ने इस घटना को लेकर सरकार पर भ्रष्टाचार और संरचनात्मक कमियों के गंभीर आरोप लगाए। इस तीखी आलोचना का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने विरोधियों को आड़े हाथों लिया और उन पर सरासर झूठ बोलने तथा जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

    पिछली सरकार की फाइलों और वर्तमान सरकार की हिम्मत का जिक्र

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष को घेरते हुए दावा किया कि पिछली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन सरकार के समय इस बेहद जरूरी प्रोजेक्ट को लगभग बंद करने की तैयारी कर ली गई थी। उन्होंने सदन को बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने दो पन्नों का एक नोट लिखकर 14 ऐसे कारण गिनाए थे जिनकी वजह से 'मिसिंग लिंक' का निर्माण असंभव बताया गया था और फाइल को बंद कर दिया गया था। उन्होंने गर्व से कहा कि यह महायुति सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति और हिम्मत थी, जिसके कारण इस बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारा जा सका।

    मुख्य ढांचे की मजबूती का दावा और सुरक्षा प्रणालियों की सराहना

    प्रोजेक्ट की मजबूती को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने सदन के सामने घटना की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि अत्यधिक बारिश के कारण पहाड़ का एक बड़ा मलबा बाहरी आर्च (मेहराब) पर आ गिरा था, जो उस भारी दबाव को न झेल पाने के कारण क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा कि मुख्य सुरंग के ढांचे में कोई दरार नहीं आई है और यह पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा, सुरंग के भीतर लगे इंटीग्रेटेड सेफ्टी सिस्टम ने बेहतरीन काम किया, जिसके तहत इमरजेंसी बटन दबाते ही महज तीन मिनट के भीतर क्रेनें मौके पर पहुंच गईं और राहत कार्य शुरू हो गया।

    latest articles

    explore more

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here