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    2021 की तरह फिर बदलेगी मोदी सरकार की टीम? कैबिनेट फेरबदल को लेकर तेज हुई चर्चाएं

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को 12 वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। इस लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने प्रशासनिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं को देखते हुए पांच बार अपनी कैबिनेट में फेरबदल किया है। इनमें से 7 जुलाई 2021 को हुआ चौथा फेरबदल अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा माना जाता है, जिसमें 12 बड़े मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई थी। वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आगामी फेरबदल भी साल 2021 की तर्ज पर ही एक बड़ा 'मेगा रीशफल' साबित हो सकता है।

    मोदी सरकार के अब तक के फेरबदल: एक नजर में

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अब तक के कार्यकाल में कब और क्यों कैबिनेट में बदलाव किए, इसका लेखा-जोखा कुछ इस तरह है:

    • 19 नवंबर 2014 (पहला विस्तार): मोदी 1.0 सरकार के गठन के कुछ महीनों बाद ही यह बदलाव हुआ। इसमें मनोहर पर्रिकर और सुरेश प्रभु जैसे कद्दावर नेताओं सहित कुल 21 नए चेहरों को जगह मिली थी।

    • 25 जुलाई 2016 (दूसरा विस्तार): आगामी राज्य चुनावों और मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया और प्रकाश जावड़ेकर जैसे नेताओं को प्रमोट किया गया।

    • 3 सितंबर 2017 (तीसरा फेरबदल): लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस बड़े फेरबदल में निर्मला सीतारमण को रक्षा और पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलीं। इसी दौरान हरदीप सिंह पुरी जैसे पूर्व नौकरशाहों की भी एंट्री हुई।

    • 7 जुलाई 2021 (चौथा फेरबदल): यह मोदी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल था। कोरोना काल के बाद मंत्रियों के प्रदर्शन को आधार बनाकर 12 दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया गया और ज्योतिरादित्य सिंधिया व अश्विनी वैष्णव सहित 43 मंत्रियों ने शपथ ली।

    • मई 2023 (पांचवां फेरबदल): यह मुख्य रूप से न्यायपालिका और सरकार के बीच तल्खी के दौर में हुआ, जहां किरेन रिजिजू के स्थान पर अर्जुन राम मेघवाल को नया कानून मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था।

    2021 का वह 'मेगा रीशफल' और उसकी परिस्थितियां

    साल 2021 का वह ऐतिहासिक फेरबदल ऐसे समय में हुआ था जब देश कोरोना महामारी की भीषण दूसरी लहर से जूझकर हटा था। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर सरकार चौतरफा आलोचनाओं से घिरी हुई थी। सरकार को अपनी छवि सुधारने और प्रशासनिक स्तर पर नई ऊर्जा की सख्त जरूरत थी।

    नतीजतन, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' जैसे कद्दावर नेताओं की कैबिनेट से छुट्टी कर दी गई। वहीं दूसरी ओर, मनसुख मांडविया (जिन्हें नया स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया), किरेन रिजिजू, हरदीप सिंह पुरी और अनुराग ठाकुर जैसे राज्य मंत्रियों को उनके अच्छे प्रदर्शन के आधार पर कैबिनेट रैंक में प्रमोट किया गया। इसके अलावा, नागरिक उड्डयन मंत्री के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया और रेल व आईटी मंत्री के रूप में अश्विनी वैष्णव जैसे नए चेहरों को सीधे कैबिनेट में एंट्री मिली।

    2026 में भी 2021 जैसे बड़े बदलाव की क्यों है अटकलें?

    आज भले ही देश के सामने कोरोना जैसी महामारी के हालात नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक मोर्चे पर चुनौतियां कम नहीं हैं। यही वजह है कि जानकार इस बार भी बड़े स्तर पर फेरबदल की उम्मीद जता रहे हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण नजर आते हैं:

    • एंटी-करप्शन और परफॉर्मेंस का दबाव: मौजूदा समय में परीक्षा व्यवस्थाओं में गड़बड़ी (पेपर लीक), इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों (जैसे उद्घाटन के कुछ समय बाद ही एक्सप्रेस-वे पर गड्ढे), पर्यावरण मंजूरियों में विसंगतियां और भ्रष्टाचार विरोधी छापों में भारी बरामदगी जैसे मामलों ने सरकार की छवि को प्रभावित किया है। प्रधानमंत्री मोदी इन विभागों में नए और बेदाग चेहरों को लाकर एक कड़ा संदेश देना चाहेंगे।

    • आर्थिक चुनौतियां: देश के सामने मौजूद बड़ी आर्थिक चुनौतियों से निपटने और नीतियों को नई गति देने के लिए संभव है कि वित्त मंत्रालय जैसे सबसे महत्वपूर्ण विभाग में भी बदलाव देखने को मिले।

    • उम्र का पैमाना और युवाओं को तरजीह: साल 2021 में कई बुजुर्ग मंत्रियों को हटाकर सिंधिया और सोनोवाल जैसे अपेक्षाकृत युवा नेताओं को आगे बढ़ाया गया था। वर्तमान मोदी 3.0 कैबिनेट में भी करीब आधा दर्जन मंत्री 70 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। इनमें हरदीप सिंह पुरी (74), मनोहर लाल खट्टर (72) और गिरिराज सिंह (71) शामिल हैं। हालांकि एस. जयशंकर (71) को उनकी विशेषज्ञता के कारण बनाए रखा जा सकता है, लेकिन बाकी सीटों पर उम्र के तकाजे के तहत बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। (गठबंधन सहयोगी होने के नाते 81 वर्षीय जीतन राम मांझी की सीट सुरक्षित मानी जा रही है)।

    • आगामी राज्यों के चुनाव और नए सियासी समीकरण: साल 2021 का फेरबदल उत्तर प्रदेश चुनाव से ठीक पहले हुआ था और इस बार भी अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने के लिए कुछ मंत्रियों को संगठन (पार्टी के काम) में भेजा जा सकता है। इसके अलावा, जिस तरह 2021 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए जगह बनाई गई थी, उसी तर्ज पर इस बार राघव चड्ढा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागियों को कैबिनेट में समायोजित करने के लिए पुराने मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है।

    वर्तमान मोदी 3.0 सरकार में प्रधानमंत्री सहित कुल 72 सदस्य (31 कैबिनेट, 5 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्य मंत्री) शामिल हैं। देखना दिलचस्प होगा कि आगामी फेरबदल में प्रधानमंत्री मोदी 2021 की तरह ही कड़े फैसले लेते हैं या नए सियासी समीकरणों को साधने के लिए कोई नया फॉर्मूला अपनाते हैं।

     

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