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    इंफाल में आगजनी से बढ़ा तनाव, पीड़ितों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

    इंफाल वेस्ट: मणिपुर के कांटो सबल गांव में हाल ही में हुई आगजनी की वारदात के बाद से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। इस घटना ने एक बार फिर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक तरफ भाजपा विधायक हेइखम डिंगो सिंह ने इस हिंसक कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने प्रशासनिक ढुलमुल रवैये को आड़े हाथों लिया है।

    सांसद ने उठाए सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल

    घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर उंगली उठाई है। उन्होंने बताया कि सामने आए वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि बेबस ग्रामीण सुरक्षाकर्मियों के सामने ही अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे थे। सांसद ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने शिष्टाचार के नाते जवाब देना भी मुनासिब नहीं समझा। अकोइजम ने तंज कसते हुए कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि के साथ प्रशासन का ऐसा अड़ियल रवैया है, तो आम जनता के साथ उनका व्यवहार कैसा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि संबंधित सुरक्षा यूनिट की कार्यप्रणाली में ही कोई बड़ी कमी है।

    शांति बहाली के दावों के बीच सुलगते घर

    कांग्रेस नेता ने सुरक्षा रणनीतियों को लेकर प्रशासन के सामने कई तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस संकट के शुरुआती दौर में कमांडिंग ऑफिसर दोनों समुदायों (कुकी और मैतेई) के संपर्क में थे और अमन-चैन बनाए रखने के लिए लगातार बैठकें कर रहे थे। इसके बावजूद, सुरक्षा बलों की मौजूदगी में ही चार घरों को आग के हवाले कर दिया गया। अकोइजम ने तर्क दिया कि जब सेना की यूनिट वहां तैनात थी, तो इस चूक की पूरी जवाबदेही उनकी बनती है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की ऐसी आपात स्थिति में सैन्य कमांडर को नागरिक प्रशासन के आदेश का इंतजार किए बिना तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए थे।

    प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की नाकामी

    सांसद ने इस पूरी घटना को प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की विफलता करार दिया है। उन्होंने सवाल किया कि जब हर तरफ सेना का पहरा था, तो उपद्रवी वारदातों को अंजाम देकर भागने में कैसे कामयाब हो गए? इसके साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर तनावपूर्ण माहौल के बीच रैली निकालने की अनुमति किसने और क्यों दी? क्या खुफिया विभागों के पास संभावित हिंसा को लेकर कोई इनपुट नहीं था? यदि पर्याप्त सुरक्षा बल जमीन पर तैनात थे, तो घरों को जलने से क्यों नहीं रोका जा सका? सांसद ने साफ किया कि इन सभी अनसुलझे सवालों के जवाब प्रशासन को हर हाल में देने होंगे।

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