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    महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल, क्या कांग्रेस का साथ छोड़ BJP के साथ जाएंगे शरद पवार?

    मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर भारी उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं, जिसने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार-SP) के प्रमुख शरद पवार के अगले सियासी कदम को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। दरअसल, मंगलवार देर रात राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों ही धड़ों के दिग्गज नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अलग-अलग मुलाकातें की हैं। इन गोपनीय बैठकों के बाद राजनीतिक विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शरद पवार का गुट आगामी दिनों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का रुख कर सकता है या राज्य में कोई बिल्कुल नया राजनीतिक समीकरण आकार लेने जा रहा है।

    विधेयक पर समर्थन और सुप्रिया सुले की घोषणा की संभावना

    सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी संसद में आगामी परिसीमन (Delimitation) विधेयक के मुद्दे पर केंद्र सरकार यानी एनडीए का समर्थन कर सकती है। इस संभावित राजनीतिक कदम को लेकर राजनीतिक हल्कों में दावा किया जा रहा है कि शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले आज दोपहर तक पार्टी के इस आधिकारिक रुख की घोषणा कर सकती हैं। इन अटकलों को बल तब मिला जब राकांपा (शरद पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने मुंबई स्थित पवार के आवास 'सिल्वर ओक' पर चर्चा करने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की, जबकि दूसरी ओर अजित पवार गुट के सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री से अलग बैठक की।

    पार्टी के भीतर आंतरिक संकट और फंड की चुनौती

    जुलाई 2023 में अजित पवार की बगावत के बाद से ही शरद पवार गुट अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी के 10 विधायकों में से लगभग आधे विधायक सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में शामिल होने के पक्ष में हैं। इन विधायकों का मानना है कि विपक्ष में रहने के कारण उन्हें अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आवश्यक फंड और प्रशासनिक मंजूरियां मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका राजनीतिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। हालांकि, इन तमाम आंतरिक दबावों के बीच शरद पवार ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और न ही किसी बैठक की आधिकारिक जानकारी साझा की गई है।

    संसद में संख्या बल का गणित और छोटे दलों की महत्ता

    भले ही महाराष्ट्र विधानसभा में शरद पवार गुट के पास केवल 10 विधायक और लोकसभा में 8 सांसद हैं, लेकिन मौजूदा राष्ट्रीय परिदृश्य में केंद्र सरकार के लिए यह संख्या बल बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार आगामी सत्रों में परिसीमन जैसे देशव्यापी और दूरगामी प्रभाव वाले महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए अपना समर्थन आधार मजबूत करना चाहती है। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्तर पर छोटे और क्षेत्रीय दलों का सहयोग हासिल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं, जिसमें शरद पवार गुट की भूमिका अहम मानी जा रही है।

    अजित पवार गुट में बेचैनी और सांगठनिक विवाद

    शरद पवार गुट की ओर से एनडीए के साथ जाने या फिर कांग्रेस में विलय जैसे विभिन्न विकल्पों पर चल रही खुली चर्चाओं ने अजित पवार गुट के भीतर भी तगड़ी बेचैनी पैदा कर दी है। सत्ताधारी गठबंधन में शामिल इस धड़े को डर है कि अगर शरद पवार गुट कोई नया कदम उठाता है तो उनका सियासी महत्व कम हो सकता है। इसी बीच, संगठन के स्तर पर भी खींचतान सामने आई है जहां पूर्व राकांपा राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने पार्टी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के चुनाव को चुनौती देते हुए एक कानूनी नोटिस भेजा है, जिसमें संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए गए हैं।

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