फुटबॉल के दिग्गज लियोनल मेसी पर उंगली उठाने वालों को एक बार फिर करारा जवाब मिला है। 39 वर्ष की उम्र में भी अर्जेंटीना के इस करिश्माई कप्तान ने यह साबित कर दिया कि महान खिलाड़ी सिर्फ स्कोरशीट पर नाम दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि बड़े मैचों का रुख पलटने के लिए जाने जाते हैं। फीफा विश्व कप 2026 के इस रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में इंग्लैंड के खिलाफ भले ही मेसी के पैर से गोल न निकला हो, लेकिन उनके दो जादुई पास (असिस्ट) की बदौलत अर्जेंटीना ने 2-1 से शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के साथ अर्जेंटीना ने लगातार दूसरी और मेसी की अगुआई में तीसरी बार विश्व कप के फाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। हालांकि, यह मुकाबला जितना मेसी की सूझबूझ का था, उतना ही इंग्लैंड के कोच थॉमस टुकेल की उस रणनीतिक भूल का भी गवाह बना जिसने जीती हुई बाजी को हार में बदल दिया।
55 मिनट तक इंग्लैंड का दबदबा, फिर पलटी बाजी
मैच की शुरुआत से ही इंग्लिश टीम ने अपनी रफ्तार और आक्रामक रुख से लातिनी अमेरिकी चैंपियन अर्जेंटीना को बैकफुट पर रखा। शुरुआती हाफ में दोनों ही टीमों ने एक-दूसरे के डिफेंस को कड़ी टक्कर दी, जिससे मुकाबला काफी शारीरिक और संघर्षपूर्ण नजर आया। मैच के 55वें मिनट में मॉर्गन रोजर्स के बेहतरीन क्रॉस को एंथनी गॉर्डन ने गोल में तब्दील कर इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। उस पल ऐसा लग रहा था कि थॉमस टुकेल की रणनीति कामयाब हो गई है और इंग्लैंड फाइनल की तरफ बढ़ रहा है। अर्जेंटीना बेहद दबाव में था क्योंकि उसके मुख्य डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज और क्रिस्टियन रोमेरो पहले ही यलो कार्ड पा चुके थे।
कोच टुकेल की वह रक्षात्मक भूल जो भारी पड़ी
बढ़त हासिल करने के बाद इंग्लैंड ने अपना आक्रामक खेल जारी रखने के बजाय जरूरत से ज्यादा रक्षात्मक रवैया अपना लिया, जो उनकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। कोच टुकेल ने 72वें मिनट में गोल दागने वाले एंथनी गॉर्डन को मैदान से बाहर बुलाकर डिफेंडर एज्री कॉन्सा को उतार दिया और टीम पांच डिफेंडरों के साथ खेलने लगी। इसके बाद 82वें मिनट में उन्होंने रीस जेम्स और डेक्लान राइस जैसे प्रमुख खिलाड़ियों को हटाकर डैन बर्न और निको ओ'राइली को मौका दिया। इन बदलावों ने साफ कर दिया कि इंग्लैंड अब अंतर बढ़ाने के मूड में नहीं है, बल्कि सिर्फ स्कोर को बचाने की कोशिश कर रहा है।
मेसी की कप्तानी में अर्जेंटीना का पलटवार
जैसे ही इंग्लिश टीम ने अपने कदम पीछे खींचे, अर्जेंटीना ने मैदान और गेंद पर पूरी तरह से नियंत्रण बना लिया। मेसी ने हर एक मूव की कमान अपने हाथों में ली। उन्होंने किसी तरह की जल्दबाजी दिखाने के बजाय धैर्यपूर्वक मौके बनाए और विरोधी टीम के डिफेंस को छकाया। 85वें मिनट में मेसी ने दाएं छोर से गेंद को अपने नियंत्रण में लिया। सबको लगा कि वह हमेशा की तरह अपने बाएं पैर से निशाना साधेंगे, लेकिन उन्होंने चतुराई से बाहर खड़े एंजो फर्नांडीज की तरफ पास बढ़ा दिया। फर्नांडीज ने बिना कोई गलती किए बॉक्स के बाहर से एक दमदार शॉट दागकर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।
इंजरी टाइम का रोमांच और लौटारो का हेडर
बराबरी का गोल होते ही अर्जेंटीना के हौसले बुलंद हो गए और ब्रिटिश टीम दबाव में बिखरने लगी। अतिरिक्त समय (स्टॉपेज टाइम) के दूसरे मिनट में मेसी ने एक बार फिर अपना क्लास दिखाया। उन्होंने अपने कमजोर माने जाने वाले दाएं पैर से एक बेहद सटीक क्रॉस डाला। इंग्लैंड के डिफेंडर जॉन स्टोन्स मार्किंग करने में चूक गए और लौटारो मार्टिनेज ने शानदार हेडर के जरिए गेंद को जाल में भेजकर अर्जेंटीना को 2-1 की चमत्कारी जीत दिला दी। आंकड़ों की मानें तो इंग्लैंड के गोल करने के बाद से लेकर मैच खत्म होने तक ब्रिटिश टीम के पास केवल 12 फीसदी बॉल पजेशन रहा, जबकि अर्जेंटीना ने 88 फीसदी समय तक गेंद को अपने कब्जे में रखा।
दिग्गजों ने माना रणनीति में हुई चूक
टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले मेसी की उम्र को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे थे, लेकिन उन्होंने इस मुकाबले में 9 सफल ड्रिब्लिंग और 2 असिस्ट देकर सबका मुंह बंद कर दिया। वह लगातार 13 अंतरराष्ट्रीय मैचों से गोल या असिस्ट में योगदान दे रहे हैं। मैच के बाद इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने भी अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा, 'बढ़त मिलते ही हम सिर्फ मैच बचाने में लग गए, जो इस स्तर पर काफी नहीं होता।' वहीं पूर्व दिग्गज वेन रूनी ने भी कोच टुकेल के इन रक्षात्मक बदलावों की कड़ी आलोचना की।
फाइनल में स्पेन की युवा सेना से होगी भिड़ंत
अब खिताब के महामुकाबले में अर्जेंटीना का सामना स्पेन से होगा। एक तरफ जहां 39 साल के मेसी अपने करियर का एक और विश्व कप जीतकर इतिहास को और सुनहरा करना चाहेंगे, वहीं दूसरी तरफ स्पेन की युवा और ऊर्जावान टीम होगी जिसकी कमान लामिन यमाल जैसे युवा सितारों के हाथों में है। इस मैच ने साफ कर दिया है कि मेसी को पूरे 90 मिनट तक रोक पाना असंभव है।


