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    Reliance Share में आएगी बंपर तेजी? मुकेश अंबानी के ₹9000 करोड़ के मास्टरस्ट्रोक पर बाजार की नजर

    मुंबई: देश की सबसे मूल्यवान कॉर्पोरेट दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के प्रमोटर ग्रुप ने बाजार में एक बड़ा कदम उठाते हुए कंपनी में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान प्रमोटर समूह ने खुले बाजार से रिलायंस के शेयरों की अतिरिक्त खरीदारी की है। प्रमोटर्स द्वारा अपनी ही कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाने के इस बड़े फैसले को बाजार के विशेषज्ञ रिलायंस के दीर्घकालिक भविष्य, उसकी व्यावसायिक रणनीतियों और विकास की संभावनाओं के प्रति प्रमोटर ग्रुप के अटूट भरोसे और प्रतिबद्धता के एक बेहद सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।

    तिमाही नतीजों के साथ शेयरहोल्डिंग का नया डेटा आया सामने

    आधिकारिक रेगुलेटरी शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी बढ़कर अब 50.48 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। अगर इसकी तुलना तीन महीने पहले यानी जनवरी-मार्च तिमाही के आंकड़ों से की जाए, तो उस समय यह हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत पर थी। इस प्रकार प्रमोटर ग्रुप ने महज एक तिमाही के भीतर बाजार से शेयर खरीदकर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को करीब 0.5 प्रतिशत तक बढ़ा लिया है, जिससे कंपनी पर उनका नियंत्रण और सुदृढ़ हुआ है।

    सेबी के 'क्रीपिंग एक्विजिशन' नियमों के तहत हुई खरीदारी

    प्रमोटर समूह द्वारा शेयरों की यह महत्वपूर्ण खरीद पूरी तरह से स्थापित कानूनी दायरे में रहकर की गई है। नियामकीय प्रावधानों के मुताबिक, यह हिस्सेदारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के 'क्रीपिंग एक्विजिशन' (Creeping Acquisition) नियमों के तहत निर्धारित की गई सीमा के भीतर ही बढ़ाई गई है। इन खास नियमों के तहत किसी भी कंपनी के मूल प्रमोटर्स को यह कानूनी अधिकार मिलता है कि वे बिना कोई अनिवार्य ओपन ऑफर लाए, बाजार से धीरे-धीरे और एक तय सीमा के अंदर अपनी कंपनी के अतिरिक्त शेयर खरीदकर अपनी हिस्सेदारी में इजाफा कर सकते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों ने लगाया हजारों करोड़ के निवेश का अनुमान

    शेयर बाजार के प्रमुख विश्लेषकों और मार्केट एक्सपर्ट्स ने प्रमोटर ग्रुप द्वारा किए गए इस औचक सौदे की कुल कीमत को लेकर बड़े अनुमान लगाए हैं। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि रिलायंस जैसी विशालकाय कंपनी में 0.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदना एक बहुत बड़ा वित्तीय लेनदेन है। बाजार की मौजूदा दरों और शेयरों के मूल्यांकन के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि प्रमोटर ग्रुप ने इन अतिरिक्त शेयरों को बाजार से बटोरने के लिए लगभग ₹8,500 करोड़ से लेकर ₹9,000 करोड़ के बीच की एक भारी-भरकम धनराशि खर्च की होगी।

    निवेशकों का बढ़ा भरोसा और रिलायंस के शेयरों पर दिखेगा असर

    प्रमोटर्स द्वारा इतनी बड़ी पूंजी लगाकर अपनी ही कंपनी के शेयर खरीदने से आम निवेशकों और शेयर बाजार में एक बेहद सकारात्मक संदेश गया है। कॉरपोरेट जगत में माना जाता है कि जब प्रमोटर खुद बाजार से शेयर खरीदते हैं, तो इसका सीधा मतलब होता है कि कंपनी के शेयर की मौजूदा कीमत आकर्षक है और आने वाले समय में इसमें बड़ी तेजी आने की उम्मीद है। इस कदम से आने वाले दिनों में रिलायंस के शेयरों में निवेशकों की लिवाली बढ़ने और स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के दबदबे को और नई मजबूती मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

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