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    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुरी रथयात्रा खत्म होने तक टली ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज

    नई दिल्ली/भुवनेश्वर। महाप्रभु जगन्नाथ के जीवन और लीलाओं पर आधारित बहुप्रतीक्षित एनिमेटेड फिल्म की देशव्यापी रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए इस फिल्म को देश भर के सिनेमाघरों में रिलीज करने की हरी झंडी दे दी है। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के सभी उत्सवों और कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद, यानी 28 जुलाई या उसके बाद कभी भी इस फिल्म को सार्वजनिक रूप से रिलीज किया जा सकेगा।

    यूट्यूब वेब सीरीज और सेंसर बोर्ड की मंजूरी को बनाया आधार

    सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने मामले के विभिन्न पहलुओं पर गौर करते हुए कहा कि यह एनिमेटेड फिल्म पहले से ही यूट्यूब (YouTube) पर प्रसारित हो चुकी एक बेहद लोकप्रिय वेब सीरीज पर आधारित है। इसके साथ ही, 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन' (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड ने भी फिल्म की समीक्षा करने के बाद इसे सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए अपनी मंजूरी (सर्टिफिकेट) दे दी है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने फिल्म के प्रसारण को रोकने का कोई औचित्य नहीं पाया।

    ओडिशा हाई कोर्ट के अंतरिम बैन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    दरअसल, फिल्म के निर्माताओं ने ओडिशा उच्च न्यायालय (ओडिशा हाई कोर्ट) के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके तहत 'एले एनिमेशन प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा निर्मित इस फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी। यह फिल्म पहले तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि ओडिशा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार से ही पवित्र रथयात्रा उत्सव की शुरुआत हो चुकी है।

    स्कंद पुराण और मंदिर की परंपराओं से जुड़ा था विवाद

    इससे पहले, ओडिशा हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि फिल्म को सिनेमाघरों में दिखाए जाने से पहले भगवान जगन्नाथ के चित्रण पर उठाई गई गंभीर आपत्तियों की विस्तार से न्यायिक जांच की जानी आवश्यक है। हाई कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश अंगुल के महेश कुमार साहू, पुरी के डॉ. प्रमोद कुमार आचार्य और निमापाड़ा के उमाशंकर आचार्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया था।

    याचिकाकर्ताओं ने सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा फिल्म को दिए गए सर्टिफिकेशन को रद्द करने और ओडिशा में इसके प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के बचपन, उनके द्वारा बोले गए संवादों और युद्ध के दृश्यों का काल्पनिक चित्रण किया गया है, जो स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण और जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी पवित्र परंपराओं व धार्मिक मान्यताओं के विपरीत हैं। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर बना असमंजस पूरी तरह समाप्त हो गया है।

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