रायपुर। पूर्व मध्य प्रदेश के समय हुए 1.86 करोड़ रुपये के चर्चित हाउसिंग लोन घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए विशेष अदालत में 15 हजार पन्नों का विस्तृत चालान पेश किया है। इस मामले में तीन आरोपियों पर सरकारी आवास योजना के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये के ऋण का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप है।
इन तीन आरोपियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
ईओडब्ल्यू द्वारा दाखिल किए गए चालान में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष थावरदास माधवानी, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू और सहकारी आवास संघ भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को नामजद किया गया है।
186 फर्जी सदस्यों के नाम पर जारी किए गए लोन
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने सरकारी आवास योजना का लाभ देने के बहाने 186 फर्जी सदस्यों के दस्तावेज तैयार किए। इन्हीं फर्जी नामों का इस्तेमाल कर हाउसिंग लोन स्वीकृत कराए गए और पूरी राशि का गबन कर लिया गया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि लोन लेने वाले उन लाभार्थियों का कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था।
बकाया राशि 104 करोड़ रुपये तक पहुंची
ईओडब्ल्यू के अनुसार, समय पर ऋण की वसूली न होने के कारण 31 दिसंबर 2025 तक मूलधन और ब्याज जुड़कर यह राशि अब 104 करोड़ रुपये के डूबत ऋण (NPA) में तब्दील हो गई है। इस वित्तीय हेरफेर से सरकारी वित्तीय संस्थाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
घोटाले की शिकायत के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच टीम जब रिकॉर्ड में दर्ज पतों पर पहुंची, तो वहां मकानों के बजाय खाली जमीन पाई गई। इसके बाद जब तथाकथित ऋणधारकों की पहचान की कोशिश की गई, तो वे सभी लाभार्थी फर्जी पाए गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पूरी आवास योजना केवल कागजों पर तैयार की गई थी ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सके।
मामले की सुनवाई अब विशेष अदालत में
ईओडब्ल्यू द्वारा 15 हजार पन्नों का चालान पेश किए जाने के बाद अब इस मामले की सुनवाई विशेष अदालत में होगी। उम्मीद है कि इन दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।


