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    सोना दोगुना करने के नाम पर करोड़ों की ठगी, पूर्व महापौर के परिवार को बनाया शिकार

    नासिक। नासिक के पूर्व महापौर अशोक देवराम मुर्तडक का परिवार एक बड़े धोखाधड़ी के मामले का शिकार हुआ है, जहां एक सर्राफा व्यापारी ने परिवार की महिलाओं से लगभग 200 तोले सोना ठग लिया है। आरोपी व्यापारी ने सोने को दोगुना करने का झांसा देकर परिवार का विश्वास जीता और फिर गहने लेकर चंपत हो गया। मौजूदा बाजार भाव के अनुसार, इस ठगी गई संपत्ति की कीमत सवा करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। पीड़ित परिवार की शिकायत पर पंचवटी पुलिस ने आरोपी योगेश बालकृष्ण दाभाड़े के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।

    विश्वासघात की पटकथा और लालच का जाल

    पूर्व महापौर के अनुसार, आरोपी योगेश दाभाड़े पिछले दो वर्षों से उनके घर आता-जाता था, जिससे परिवार ने उस पर भरोसा करना शुरू कर दिया। आरोपी ने मुर्तडक की पत्नी, बेटी और बहू को उनके पास मौजूद कुल 200 तोला सोने के आभूषणों को दोगुना करके लौटाने का प्रलोभन दिया। महिलाओं ने सहजता से अपने आभूषण उसे सौंप दिए। जनवरी 2025 से पूर्व ली गई यह भारी मात्रा में सोने की खेप जब लंबे समय तक वापस नहीं मिली, तब परिवार को धोखाधड़ी का अहसास हुआ और मामले की जानकारी मुर्तडक को दी गई।

    टालमटोल और डेढ़ साल का लंबा इंतजार

    जब परिवार ने आरोपी से संपर्क कर दोगुना सोना नहीं, बल्कि अपना मूल आभूषण ही वापस मांगा, तो दाभाड़े ने टालमटोल शुरू कर दी। वह लगातार बहाने बनाकर समय काटता रहा। करीब डेढ़ वर्ष का लंबा समय बीत जाने के बाद भी जब सोना नहीं लौटाया गया, तो परिवार ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया। मुर्तडक की शिकायत पर पंचवटी पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि आरोपी ने इतने बड़े पैमाने पर लिए गए सोने का क्या उपयोग किया और क्या उसे बाजार में कहीं निवेश कर दिया गया है।

    राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हड़कंप

    पूर्व महापौर के परिवार के साथ हुई इस बड़ी ठगी ने नासिक के राजनीतिक और व्यापारिक जगत में सनसनी फैला दी है। सोने के बढ़ते दामों के बीच हुई इस घटना ने सर्राफा कारोबार की साख पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की प्राथमिकता अब आरोपी को गिरफ्तार कर ठगी गई संपत्ति की बरामदगी सुनिश्चित करने की है। यह मामला इस बात की चेतावनी भी है कि किसी भी प्रकार के प्रलोभन में आकर अपनी कीमती जमा-पूंजी या स्त्रीधन को किसी अपरिचित या अविश्वसनीय व्यक्ति को नहीं सौंपना चाहिए।

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