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    UP चुनाव की तैयारी तेज, अमित शाह बिछा रहे चुनावी बिसात, रणनीति पर बड़ा फोकस

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। राज्य में जीत की हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से गृहमंत्री अमित शाह ने कमान संभाल ली है। वे शीघ्र ही प्रदेश के सभी छह संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं को जीत का संकल्प दिलाएंगे। भाजपा की रणनीति में इस बार उन सीटों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जहाँ पार्टी को पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। शाह के इस दौरे की शुरुआत ब्रज क्षेत्र से होने की संभावना है।

    हारी हुई सीटों पर जीत की नई रणनीति

    भाजपा का मुख्य फोकस वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में लगातार हारी हुई 61 सीटों पर है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 के चुनाव में 5000 से कम मतों के अंतर से हारी हुई 49 सीटों का भी सूक्ष्म विश्लेषण किया जा रहा है। पार्टी इन सीटों पर जातिगत समीकरणों, बूथ प्रबंधन और संभावित उम्मीदवारों का नए सिरे से सर्वे करा रही है। मिशन 2027 को सफल बनाने के लिए बूथ स्तर से लेकर लाभार्थी संपर्क तक, हर स्तर पर संगठन को मजबूत किया जा रहा है। गृहमंत्री अमित शाह, जिन्हें उत्तर प्रदेश में भाजपा की पिछली जीतों का 'चाणक्य' माना जाता है, के मार्गदर्शन में पार्टी तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर आश्वस्त है।

    टिकट वितरण में जीत की संभावना को प्राथमिकता

    पार्टी ने टिकट वितरण को लेकर भी सख्त मानदंड तय कर दिए हैं। अब केवल वरिष्ठता या अनुभवी चेहरा होना ही उम्मीदवारी की गारंटी नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार, तीन या उससे अधिक बार चुनाव लड़ चुके नेताओं के चुनावी प्रदर्शन, जीत-हार के अंतर और बूथ स्तर पर उनकी सक्रियता का बारीकी से आकलन किया जा रहा है। यदि किसी नेता की जीत की संभावना कमजोर पाई जाती है, तो उनके टिकट पर कैंची चल सकती है। भाजपा इस बार पूरी तरह 'विनिबिलिटी फैक्टर' (जीतने की क्षमता) को टिकट का आधार बना रही है।

    वैचारिक चुनौतियां और विपक्ष की सक्रियता

    भाजपा के सामने 2027 की राह उतनी आसान नहीं है। राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी का विवाद पार्टी के लिए भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर एक चुनौती बनकर उभरा है, क्योंकि राम मंदिर भाजपा की सबसे प्रमुख वैचारिक पहचान का केंद्र है। साथ ही, विपक्ष भी अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है और अखिलेश यादव जल्द ही रथ यात्रा के माध्यम से जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की तैयारी में हैं। इन चुनौतियों के बीच भाजपा का लक्ष्य न केवल अपनी वर्तमान सीटों को सुरक्षित रखना है, बल्कि हारी हुई सीटों को जीतकर 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी राह को और अधिक सुगम बनाना है।

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