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    बिहार की न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल क्रांति: पटना में न्यायश्रुति प्रणाली का पहला सफल मॉक ट्रायल, अब ऑनलाइन होगी गवाही

    पटना। बिहार की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पटना में न्यायश्रुति प्रणाली का पहला सफल मॉक ट्रायल आयोजित किया गया। इस नई डिजिटल व्यवस्था के लागू होने के बाद राज्य के न्यायालयों में पुलिस अधिकारियों, जेल में बंद कैदियों, गवाहों और वैज्ञानिक विशेषज्ञों को गवाही देने के लिए अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं होगी। वे सुरक्षित और प्रमाणित डिजिटल माध्यम से अपनी गवाही दर्ज करा सकेंगे।

    – पटना कोर्ट में हुआ सफल परीक्षण
    पायलट प्रोजेक्ट के तहत शुक्रवार को पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-23 गौरव कुमार की अदालत में एक आपराधिक मामले का सफल मॉक ट्रायल किया गया। इस परीक्षण के दौरान अभियोजन कार्यालय, बेउर स्थित आदर्श केंद्रीय कारा, पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) तथा अन्य संबंधित संस्थानों को एकीकृत कर न्यायश्रुति प्रणाली के माध्यम से डिजिटल गवाही की पूरी प्रक्रिया का सफल परीक्षण किया गया। पूरे मॉक ट्रायल का तकनीकी संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा किया गया। परीक्षण के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता, सुरक्षा और समन्वय की सफलतापूर्वक जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, सभी चरण सुचारु रूप से संपन्न हुए और प्रणाली पूरी तरह सफल साबित हुई।

    – अब सभी जिला न्यायालयों में होगा विस्तार
    गृह विभाग ने बताया कि सफल परीक्षण के बाद न्यायश्रुति प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से बिहार के सभी जिला न्यायालयों में लागू किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तकनीकी संसाधन, डिजिटल नेटवर्क और आधारभूत संरचना को विकसित एवं मजबूत किया जाएगा, ताकि न्यायिक कार्यवाही बिना किसी बाधा के संचालित हो सके।

    – न्यायिक प्रक्रिया होगी अधिक तेज और पारदर्शी
    न्यायश्रुति प्रणाली के लागू होने से अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। इसके माध्यम से पुलिस अधिकारियों, जेल में बंद आरोपियों, वैज्ञानिक विशेषज्ञों और गवाहों की डिजिटल उपस्थिति सुनिश्चित होगी, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। साथ ही सुरक्षा संबंधी जोखिम भी कम होंगे और अनावश्यक आवागमन की जरूरत समाप्त हो जाएगी।

    – आम लोगों को मिलेगा त्वरित और सुलभ न्याय
    सरकार का मानना है कि इस तकनीक के जरिए न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध बनेगी। इससे न केवल अदालतों पर कार्यभार कम होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी तेजी से न्याय मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायश्रुति प्रणाली बिहार की न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकती है और भविष्य में न्याय वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक एवं सुगम बनाएगी।

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