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    ‘प्रेम गली अति साँकरी’ का भव्य विमोचन, प्रेम और संवेदना की कविता को मिली नई पहचान

    अलवर में साहित्यकारों ने कहा— प्रेम प्रकाश शर्मा का पहला काव्य संग्रह मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज

    अलवर। राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर की पांडुलिपि प्रकाशन सहयोग योजना के अंतर्गत प्रकाशित साहित्यकार एवं शिक्षाविद् प्रेम प्रकाश शर्मा के प्रथम काव्य संग्रह ‘प्रेम गली अति साँकरी’ का रविवार को अलवर के लोटस हॉल, ब्राह्मण छात्रावास परिसर, घोड़ा फेर चौराहा में गरिमामय वातावरण में विमोचन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन किताबवर्स यूट्यूब चैनल के तत्वावधान में हुआ।

    कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यिक अतिथियों द्वारा काव्य संग्रह के विमोचन के साथ हुआ। समारोह में साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों पर केंद्रित विचारों ने उपस्थित साहित्यप्रेमियों को गहराई से प्रभावित किया।

    मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कल्पित ने कहा कि “प्रेम की कविता प्रेम प्रकाश शर्मा के लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन जीने का मार्ग है।” उन्होंने कहा कि प्रेम मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है और वही साहित्य श्रेष्ठ है, जो संवेदना, करुणा और आत्मीयता को जीवित रखे। उन्होंने युवा रचनाकारों के गंभीर साहित्य की ओर बढ़ते कदमों को हिंदी साहित्य के लिए शुभ संकेत बताया।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वामी निर्वाण बोधिसत्व ने प्रेम शर्मा की कविताओं में निहित क्रांतिकारी चेतना की सराहना करते हुए उन्हें एक सजग और संवेदनशील कवि की अभिव्यक्ति बताया।

    विशिष्ट अतिथि विनीत चौहान ने काव्य संग्रह के शीर्षक ‘प्रेम गली अति साँकरी’ की व्याख्या करते हुए कहा कि आज के स्वार्थपूर्ण समय में प्रेम के विस्तार की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कविता किसी बंधे-बंधाए ढांचे में सीमित नहीं होनी चाहिए और यह संग्रह मुक्तछंद कविता की सशक्त कड़ी है।

    आगरा के सुविख्यात चित्रकार नरेश कुमार ने पुस्तक के आवरण चित्र की रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डाला, जबकि एडवोकेट धीरज गुप्ता ने प्रेम प्रकाश शर्मा के व्यक्तित्व के कम चर्चित पहलुओं को साझा किया। गीतकार रामचरण राग ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की और लेखक का परिचय कराया।

    समालोचक-कवि लोकेश तिवाड़ी ने संग्रह की कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रेम केवल एक भाव नहीं, बल्कि मनुष्य को मनुष्य से जोड़ने वाली जीवन-दृष्टि है। डॉ. दीपक चंदवानी ने कविता को आज के जटिल समय में मनुष्यता बचाने का प्रभावी माध्यम बताया। वहीं कवि-फिल्मकार राजेंद्र शर्मा ने संग्रह की भाषा, भावों की गहराई और मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को इसकी प्रमुख विशेषता बताया।

    युवा पाठक यथार्थ कुमार ने प्रेम प्रकाश शर्मा के व्यक्तित्व से जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए।

    अपने संबोधन में प्रेम प्रकाश शर्मा ने राजस्थान साहित्य अकादमी, सभी अतिथियों और साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह काव्य संग्रह उनके जीवनानुभवों, संवेदनाओं और प्रेम की व्यापक मानवीय अवधारणा की अभिव्यक्ति है।

    कार्यक्रम में अलवर सहित विभिन्न शहरों से आए साहित्यकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, कवियों और साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन पूर्णिमा, रिया और मोनिका ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन किया गया।

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